महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअष्टाधिकद्विशततमोऽध्यायः
ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन
युधिष्ठिर उवाच
के पूर्वमासन् पतयः प्रजानां भरतर्षभ ।
के चर्षयो महाभागा दिक्षु प्रत्येकशः स्मृताः ॥ १ ॥
युधिष्ठिरने पूछा— भरतश्रेष्ठ! पूर्वकालमें कौन-कौन-से लोग प्रजापति थे और प्रत्येक दिशामें किन-किन महाभाग महर्षियोंकी स्थिति मानी गयी है ॥ १ ॥
भीष्म उवाच
श्रूयतां भरतश्रेष्ठ यन्मां त्वं परिपृच्छसि ।
प्रजानां पतयो येऽस्मिन् दिक्षु ये चर्षयः स्मृताः ॥ २ ॥
भीष्मजीने कहा— भरतश्रेष्ठ! इस जगत्में जो प्रजापति रहे हैं तथा सम्पूर्ण दिशाओंमें जिन-जिन ऋषियोंकी स्थिति मानी गयी है, उन सबको जिनके विषयमें तुम मुझसे पूछते हो; मैं बताता हूँ, सुनो ॥ २ ॥
एकः स्वयम्भूर्भगवानाद्यो ब्रह्मा सनातनः ।
ब्रह्मणः सप्त वै पुत्रा महात्मानः स्वयम्भुवः ॥ ३ ॥
एकमात्र सनातन भगवान् स्वयम्भू ब्रह्मा सबके आदि हैं। स्वयम्भू ब्रह्माके सात महात्मा पुत्र बताये गये हैं ॥ ३ ॥
मरीचिरत्र्यङ्गिरसौ पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः ।
वसिष्ठश्च महाभागः सदृशो वै स्वयम्भुवा ॥ ४ ॥
उनके नाम इस प्रकार हैं—मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु तथा महाभाग वसिष्ठ। ये सभी स्वयम्भू ब्रह्माके समान ही शक्तिशाली हैं ॥ ४ ॥
सप्तब्रह्माण इत्येते पुराणे निश्चयं गताः ।
अत ऊर्ध्वं प्रवक्ष्यामि सर्वानैव प्रजापतीन् ॥ ५ ॥
पुराणमें ये सात ब्रह्मा निश्चित किये गये हैं। अब मैं समस्त प्रजापतियोंका वर्णन आरम्भ करता हूँ ॥ ५ ॥
अत्रिवंशसमुत्पन्नो ब्रह्मयोनिः सनातनः ।
प्राचीनबर्हिर्भगवान्स्तस्मात् प्राचेतसो दश ॥ ६ ॥
अत्रिकुलमें उत्पन्न जो सनातन ब्रह्मयोनि भगवान् प्राचीनबर्हि हैं, उनसे प्राचेतस नामवाले दस प्रजापति उत्पन्न हुए ॥ ६ ॥