भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

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तृतीयोऽध्यायः

विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न

युधिष्ठिर उवाच

ब्राह्मण्यं यदि दुष्प्राप्यं त्रिभिर्वर्णैर्नराधिप ।
कथं प्राप्तं महाराज क्षत्रियेण महात्मना ॥ १ ॥
विश्वामित्रेण धर्मात्मन् ब्राह्मणत्वं नरर्षभ ।
श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन तन्मे ब्रूहि पितामह ॥ २ ॥
युधिष्ठिरने पूछा— महाराज! नरेश्वर! यदि अन्य तीन वर्णोंके लिये ब्राह्मणत्व प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है तो क्षत्रियकुलमें उत्पन्न महात्मा विश्वामित्रने कैसे ब्राह्मणत्व प्राप्त कर लिया? धर्मात्मन्! नरश्रेष्ठ पितामह! इस बातको मैं यथार्थरूपसे सुनना चाहता हूँ, आप मुझे बताइये ॥ १-२ ॥

तेन ह्यमितवीर्येण वसिष्ठस्य महात्मनः ।
हतं पुत्रशतं सद्यस्तपसापि पितामह ॥ ३ ॥
पितामह! अमित पराक्रमी विश्वामित्रने अपनी तपस्याके प्रभावसे महात्मा वसिष्ठके सौ पुत्रोंको तत्काल नष्ट कर दिया था ॥ ३ ॥

यातुधानाश्च बहवो राक्षसास्तिग्मतेजसः ।
मन्युनाऽऽविष्टदेहेन सृष्टाः कालान्तकोपमाः ॥ ४ ॥
उन्होंने क्रोधके आवेशमें आकर बहुत-से प्रचण्ड तेजस्वी यातुधान एवं राक्षस रच डाले थे जो काल और यमराजके समान भयानक थे ॥ ४ ॥

महान् कुशिकवंशश्च ब्रह्मर्षिशतसंकुलः ।
स्थापितो नरलोकेऽस्मिन् विद्वद्ब्राह्मणसंस्तुतः ॥ ५ ॥
इतना ही नहीं, इस मनुष्य-लोकमें उन्होंने उस महान् कुशिक-वंशको स्थापित किया जो अब सैकड़ों ब्रह्मर्षियोंसे व्याप्त और विद्वान् ब्राह्मणोंसे प्रशंसित है ॥ ५ ॥

ऋचीकस्यात्मजश्चैव शुनःशेपो महातपाः ।
विमोक्षितो महासत्रात् पशुतामप्युपागतः ॥ ६ ॥
ऋचीक (अजीगर्त) का महातपस्वी पुत्र शुनःशेप एक यज्ञमें यज्ञ-पशु बनाकर लाया गया था; किंतु विश्वामित्रजीने उस महायज्ञसे उसको छुटकारा दिला दिया ॥ ६ ॥

हरिश्चन्द्रक्रतौ देवांस्तोषयित्वाऽऽत्मतेजसा ।
पुत्रतामनुसम्प्राप्तो विश्वामित्रस्य धीमतः ॥ ७ ॥