महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 926, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंपुरुषसिंह! भोजन करते समय भोजनके विषयमें शंका नहीं करनी चाहिये तथा अपना भला चाहनेवाले पुरुषको भोजनके अन्तमें दही नहीं पीना चाहिये ।। ९९ ।। आचम्य चैकहस्तेन परिप्लाव्यं तथोदकम् । अंगुष्ठं चरणस्याथ दक्षिणस्यावसेचयेत् ।। १०० ।। भोजन करनेके पश्चात् कुल्ला करके मुँह धो ले और एक हाथसे दाहिने पैरके अँगूठेपर पानी डाले ।। पाणिं मूर्ध्नि समाधाय स्पृष्ट्वा चाग्निं समाहितः । ज्ञातिश्रैष्ठ्यमवाप्नोति प्रयोगकुशलो नरः ।। १०१ ।। फिर प्रयोगकुशल मनुष्य एकाग्रचित्त हो अपने हाथको सिरपर रखे। उसके बाद अग्निका मनसे स्पर्श करे। ऐसा करनेसे वह कुटुम्बीजनोंमें श्रेष्ठता प्राप्त कर लेता है ।। १०१ ।। अद्भिः प्राणान् समालभ्य नाभिं पाणितले तथा । स्पृशंश्चैव प्रतिष्ठेत न चाप्यार्द्रण पाणिना ।। १०२ ।। इसके बाद जलसे आँख, नाक आदि इन्द्रियों और नाभिका स्पर्श करके दोनों हाथोंकी हथेलियोंको धो डाले। धोनेके पश्चात् गीले हाथ लेकर ही न बैठ जाय (उन्हें कपड़ोंसे पोंछकर सुखा दे) ।। १०२ ।। अंगुष्ठस्यान्तराले च ब्राह्मं तीर्थमुदाहृतम् । कनिष्ठिकायाः पश्चात् तु देवतीर्थमिहोच्यते ।। १०३ ।। अँगूठेका अन्तराल (मूलस्थान) ब्राह्मतीर्थ कहलाता है, कनिष्ठा आदि अँगुलियोंका पश्चाद्भाग (अग्रभाग) देवतीर्थ कहा जाता है ।। १०३ ।। अङ्गुष्ठस्य च यन्मध्यं प्रदेशिन्याश्च भारत । तेन पित्र्याणि कुर्वीत स्पृष्ट्वापो न्यायतः सदा ।। १०४ ।। भारत! अंगुष्ठ और तर्जनीके मध्यभागको पितृतीर्थ कहते हैं। उसके द्वारा शास्त्रविधिसे जल लेकर सदा पितृकार्य करना चाहिये ।। १०४ ।। परापवादं न ब्रूयान्नाप्रियं च कदाचन । न मन्युः कश्चिदुत्पाद्यः पुरुषेण भवार्थिना ।। १०५ ।। अपनी भलाई चाहनेवाले पुरुषको दूसरोंकी निन्दा तथा अप्रिय वचन मुँहसे नहीं निकालने चाहिये और किसीको क्रोध भी नहीं दिलाना चाहिये ।। १०५ ।। पतितैस्तु कथां नेच्छेद् दर्शनं च विवर्जयेत् । संसर्गं च न गच्छेत तथाऽऽयुर्विन्दते महत् ।। १०६ ।। पतित मनुष्योंके साथ वार्तालापकी इच्छा न करे। उनका दर्शन भी त्याग दे और उनके सम्पर्कमें कभी न जाय। ऐसा करनेसे मनुष्य बड़ी आयु पाता है ।। १०६ ।। न दिवा मैथुनं गच्छेन्न कन्यां न च बन्धकीम् ।