मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण
Matsya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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[ १० ]
| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| साथ वार्तालाप और भगवान्द्वारा वध | ७०० | और उसका माहात्म्य तथा हरिकेशको शिवजीद्वारा वरप्राप्ति | ७४४ | ||
| १७१- | ब्रह्माके मानस पुत्रोंकी उत्पत्ति, दक्षकी बारह कन्याओंका वृत्तान्त, ब्रह्माद्वारा सृष्टिका विकास तथा विविध देवयोनियोंकी उत्पत्ति | ७०२ | १८१- | अविमुक्तक्षेत्र-(वाराणसी) का माहात्म्य | ७५३ |
| १७२- | तारकामय-संग्रामकी भूमिका एवं भगवान् विष्णुका महासमुद्रके रूपमें वर्णन, तारकादि असुरोंके अत्याचारसे दुःखी होकर देवताओंकी भगवान् विष्णुसे प्रार्थना और भगवान्का उन्हें आश्वासन | ७०७ | १८२- | अविमुक्त-माहात्म्य | ७५५ |
| १७३- | दैत्यों और दानवोंकी युद्धार्थ तैयारी | ७११ | १८३- | अविमुक्तमाहात्म्यके प्रसङ्गमें शिव-पार्वतीका प्रश्नोत्तर | ७५७ |
| १७४- | देवताओंका युद्धार्थ अभियान | ७१३ | १८४- | काशीकी महिमाका वर्णन | ७६५ |
| १७५- | देवताओं और दानवोंका घमासान युद्ध, मयकी तामसी माया, और्वाग्निकी उत्पत्ति और महर्षि ऊर्वद्वारा हिरण्यकशिपुको उसकी प्राप्ति | ७१७ | १८५- | वाराणसी-माहात्म्य | ७७० |
| १७६- | चन्द्रमाकी सहायतासे वरुणद्वारा और्वाग्नि-मायाका प्रशमन, मयद्वारा शैली-मायाका प्राकट्य, भगवान् विष्णुके आदेशसे अग्नि और वायुद्वारा उस मायाका निवारण तथा कालनेमिका रणभूमिमें आगमन | ७२३ | १८६- | नर्मदा-माहात्म्यका उपक्रम | ७७६ |
| १७७- | देवताओं और दैत्योंकी सेनाओंकी अद्भुत मुठभेड़, कालनेमिका भीषण पराक्रम और उसकी देवसेनापर विजय | ७२७ | १८७- | नर्मदा-माहात्म्यके प्रसङ्गमें पुनः त्रिपुराख्यान | ७८० |
| १७८- | कालनेमि और भगवान् विष्णुका रोषपूर्वक वार्तालाप और भीषण युद्ध, विष्णुके चक्रके द्वारा कालनेमिका वध और देवताओंको पुनः निज पदकी प्राप्ति | ७३२ | १८८- | त्रिपुर-दाहका वृत्तान्त | ७८४ |
| १७९- | शिवजीके साथ अन्धकासुरका युद्ध, शिवजीद्वारा मातृकाओंकी सृष्टि, शिवजीके हाथों अन्धककी मृत्यु और उसे गणेशत्वकी प्राप्ति, मातृकाओंकी विध्वंसलीला तथा विष्णुनिर्मित देवियोंद्वारा उनका अवरोध | ७३८ | १८९- | नर्मदा-कावेरी-संगमका माहात्म्य | ७९१ |
| १८०- | वाराणसी-माहात्म्यके प्रसङ्गमें हरिकेश यक्षकी तपस्या, अविमुक्तकी शोभा | १९०- | नर्मदाके तटवर्ती तीर्थ | ७९२ | |
| १९१- | नर्मदाके तटवर्ती तीर्थोंका माहात्म्य | ७९४ | |||
| १९२- | शुक्लतीर्थका माहात्म्य | ८०३ | |||
| १९३- | नर्मदा-माहात्म्य-प्रसङ्गमें कपिलादि विविध तीर्थोंका माहात्म्य, भृगुतीर्थका माहात्म्य, भृगुमुनिकी तपस्या, शिव-पार्वतीका उनके समक्ष प्रकट होना, भृगुद्वारा उनकी स्तुति और शिवजीद्वारा भृगुको वर प्रदान | ८०६ | |||
| १९४- | नर्मदातटवर्ती तीर्थोंका माहात्म्य | ८१२ | |||
| १९५- | गोत्रप्रवर-निरूपण-प्रसङ्गमें भृगुवंशकी परम्पराका विवरण | ८१६ | |||
| १९६- | प्रवरानुकीर्तनमें महर्षि अङ्गिराके वंशका वर्णन | ८१९ | |||
| १९७- | महर्षि अत्रिके वंशका वर्णन | ८२३ | |||
| १९८- | प्रवरानुकीर्तनमें महर्षि विश्वामित्रके वंशका वर्णन | ८२४ | |||
| १९९- | गोत्रप्रवर-कीर्तनमें महर्षि कश्यपके वंशका वर्णन | ८२५ | |||
| २००- | गोत्रप्रवर-कीर्तनमें महर्षि वसिष्ठकी शाखाका कथन | ८२७ | |||
| २०१- | प्रवरानुकीर्तनमें महर्षि पराशरके वंशका वर्णन | ८२९ | |||
| २०२- | गोत्रप्रवरकीर्तनमें महर्षि अगस्त्य, पुलह, पुलस्त्य और क्रतुकी |