मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ से भी इस ओर कुछ प्रकाश पडता है। दूदा जी की पुत्री का राणा कुम्भ के साथ ब्याहा जाना समय के दृष्टिकोण से असगत भी नही ठहरता। यहाँ एक और पहलू भी विशेष विचारणीय है। राजस्थान और बगाल की जनश्रुतियाँ मीराँ को सधवा ही प्रमाणित करती है परन्तु ऐसो क्षेत्रो मे जहाँ मीराँ के साहित्य का प्रचार पिछले कुछ वर्षो मे हुआ है, जनश्रुति मीराँ को विधवा ही मानती है। मीराँ के जीवन का प्रमुख भाग राजस्थान मे व्यतीत हुआ अत वहाँ की जनश्रुति तुलनात्मक दृष्टिकोण से अधिक मान्य है। मीराँ की ख्याति राजस्थान के बाहर बगाल मे ही सर्व-प्रथम फैली, यहाँ तक कि बगाल मे 'भजन' शब्द ही मीराँ के पदो के लिये रूढिरूप हो गया। अत राजस्थान के बाद बगाल की जनश्रुति को ही विशेष महत्व दिया जा सकता है। इन दोनो ही जनश्रुतियो से मीराँ विधवा सिद्ध नही होती। विभिन्न स्थलो पर एक ही रूप मे चलने वाली जनश्रुति नितान्त निराधार हो, ऐसा सम्भव नही प्रतीत होता। भक्त-गाथाओ के आधार पर भी मीराँ का वैधव्य कही से भी लक्षित नही होता। अस्तु, अद्यावधि मान्य इतिहास की अपूर्णता को देखते प्राय सभी पदो से व्यक्त होती उपर्युक्त भावना को कोरी जनश्रुति कह कर कदापि टाला नही जा सकता। ऐसी कुछ पदाभिव्यक्तियो मे मीराँ के दृढ भक्ति-भाव की भूरि-भूरि प्रशसा भी मिलती है। स्पष्ट ही है कि ऐसी भक्तिमती नारी द्वारा स्वय अपनी प्रशसा असगत ही है। फिर ऐसे पदो की क्रिया तृतीय-पुरुष वाचक है। इस से भी यही लक्षित होता है कि ऐसे पद किसी अन्य की रचना है। मतभेद द्योतक अधिकाश पद राजस्थानी भाषा मे ही प्राप्त है। कुछ पद ब्रज मिश्रित राजस्थानी मे और कुछ थोडे से शुद्ध ब्रजभाषा मे भी मिलते है। मतभेद द्योतक पदो मे अधिकाश का राजस्थानी मे पाया जाना सगत भी है। इन राजस्थानी मे प्राप्त पदो की अभिव्यक्ति पर सतमत का गहरा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है जब कि ब्रजभाषा मे प्राप्त पदो पर वैष्णव-प्रभाव ही अधिक स्पष्ट है। ब्रज मिश्रित राजस्थानी मे प्राप्त पदो पर दोनो ही मतो का प्रभाव है। भाषा के परिवर्तन के साथ ही साथ भावाभिव्यक्ति मे आया यह गहरा परिवर्तन विशेष विचारणीय है। प्राप्त पदाभिव्यक्तियो से ही यह प्रत्यक्ष हो जाता है कि यह मतभेद शीघ्र ही कटु सघर्ष मे परिवर्तित हो गया। "ताला चौकी" बिठा कर मीराँ को महलो की सीमा मे बाँध रखने का निष्फल प्रयास बार बार