मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Mundaka Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished134 पृष्ठ
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श्रीहरिः
विषय-सूची
| विषय | पृष्ठ | ||
|---|---|---|---|
| १. शान्तिपाठ | ... | ... | १ |
प्रथम मुण्डक
प्रथम खण्ड
| विषय | पृष्ठ | ||
|---|---|---|---|
| २. सम्बन्धभाष्य | ... | ... | २ |
| ३. आचार्यपरम्परा | ... | ... | ५ |
| ४. शौनककी गुरूपसत्ति और प्रश्न | ... | ... | ८ |
| ५. अङ्गिराका उत्तर—विद्या दो प्रकारकी है | ... | ... | ११ |
| ६. परा और अपरा विद्याका स्वरूप | ... | ... | १२ |
| ७. परविद्याप्रदर्शन | ... | ... | १५ |
| ८. अक्षरब्रह्मका विश्वकारणत्व | ... | ... | १८ |
| ९. सृष्टिक्रम | ... | ... | १९ |
| १०. प्रकरणका उपसंहार | ... | ... | २१ |
द्वितीय खण्ड
| विषय | पृष्ठ | ||
|---|---|---|---|
| ११. कर्मनिरूपण | ... | ... | २३ |
| १२. अग्निहोत्रका वर्णन | ... | ... | २६ |
| १३. विधिहीन कर्मका कुफल | ... | ... | २७ |
| १४. अग्निकी सात जिह्वाएँ | ... | ... | २९ |
| १५. विधिवत् अग्निहोत्रादिसे स्वर्गप्राप्ति | ... | ... | ३० |
| १६. ज्ञानरहित कर्मकी निन्दा | ... | ... | ३२ |
| १७. अविद्याग्रस्त कर्मठोंकी दुर्दशा | ... | ... | ३४ |
| १८. ऐहिक और पारलौकिक भोगोंकी असारता देखनेवाले पुरुषके लिये संन्यास और गुरूपसदनका विधान | ... | ... | ३९ |
| १९. गुरुके लिये उपदेशप्रदानकी विधि | ... | ... | ४२ |