मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Mundaka Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished134 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| द्वितीय मुण्डक | |
| प्रथम खण्ड | |
| २०. अग्निसे स्फुलिङ्गोंके समान ब्रह्मसे जगत्की उत्पत्ति | ... ... ४४ |
| २१. ब्रह्मका पारमार्थिक स्वरूप | ... ... ४६ |
| २२. ब्रह्मका सर्वकारणत्व | ... ... ५० |
| २३. सर्वभूतान्तरात्मा ब्रह्मका विश्वरूप | ... ... ५२ |
| २४. अक्षर पुरुषसे चराचरकी उत्पत्तिका क्रम | ... ... ५४ |
| २५. कर्म और उनके साधन भी पुरुषप्रसूत ही हैं | ... ... ५५ |
| २६. इन्द्रिय, विषय और इन्द्रियस्थानादि भी ब्रह्मजनित ही हैं | ... ... ५७ |
| २७. पर्वत, नदी और ओषधि आदिका ब्रह्मजन्यत्व | ... ... ५९ |
| २८. ब्रह्म और जगत्का अभेद तथा ब्रह्मज्ञानसे अविद्या-ग्रन्थिका नाश | ... ... ६० |
| द्वितीय खण्ड | |
| २९. ब्रह्मका स्वरूपनिर्देश तथा उसे जाननेके लिये आदेश | ... ... ६२ |
| ३०. ब्रह्ममें मनोनिवेश करनेका विधान | ... ... ६४ |
| ३१. ब्रह्मवेधनकी विधि | ... ... ६६ |
| ३२. वेधनके लिये ग्रहण किये जानेवाले धनुषादिका स्पष्टीकरण | ... ... ६७ |
| ३३. आत्मसाक्षात्कारके लिये पुनः विधि | ... ... ६९ |
| ३४. ओंकाररूपसे ब्रह्मचिन्तनकी विधि | ... ... ७० |
| ३५. अपर ब्रह्मका वर्णन तथा उसके चिन्तनका प्रकार | ... ... ७२ |
| ३६. ब्रह्मसाक्षात्कारका फल | ... ... ७५ |
| ३७. ज्योतिर्मय ब्रह्म | ... ... ७६ |
| ३८. ब्रह्मका सर्वप्रकाशकत्व | ... ... ७८ |
| ३९. ब्रह्मका सर्वव्यापकत्व | ... ... ८० |
| तृतीय मुण्डक | |
| प्रथम खण्ड | |
| ४०. प्रकारान्तरसे ब्रह्मनिरूपण | ... ... ८२ |
| ४१. समान वृक्षपर रहनेवाले दो पक्षी | ... ... ८३ |