मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Mundaka Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished134 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | ||
|---|---|---|---|
| ४२. ईश्वरदर्शनसे जीवकी शोकनिवृत्ति | ... | ... | ८५ |
| ४३. श्रेष्ठतम ब्रह्मज्ञ | ... | ... | ८८ |
| ४४. आत्मदर्शनके साधन | ... | ... | ९२ |
| ४५. सत्यकी महिमा | ... | ... | ९४ |
| ४६. परमपदका स्वरूप | ... | ... | ९६ |
| ४७. आत्मसाक्षात्कारका असाधारण साधन—चित्तशुद्धि | ... | ९८ | |
| ४८. शरीरमें इन्द्रियरूपसे अनुप्रविष्ट हुए आत्माका चित्तशुद्धिद्वारा साक्षात्कार | ... | ... | १०० |
| ४९. आत्मज्ञका वैभव और उसकी पूजाका विधान | ... | १०१ |
द्वितीय खण्ड
५०. आत्मवेत्ताकी पूजाका फल | ... | ... | १०३ ५१. निष्कामतासे पुनर्जन्मनिवृत्ति | ... | ... | १०४ ५२. आत्मदर्शनका प्रधान साधन—जिज्ञासा | ... | ... | १०६ ५३. आत्मदर्शनके अन्य साधन | ... | ... | १०७ ५४. आत्मदर्शीकी ब्रह्मप्राप्तिका प्रकार | ... | ... | १०९ ५५. ज्ञातज्ञेयकी मोक्षप्राप्ति | ... | ... | ११० ५६. मोक्षका स्वरूप | ... | ... | ११३ ५७. ब्रह्मप्राप्तिमें नदी आदिका दृष्टान्त | ... | ... | ११५ ५८. ब्रह्मवेत्ता ब्रह्म ही है | ... | ... | ११५ ५९. विद्याप्रदानकी विधि | ... | ... | ११७ ६०. उपसंहार | ... | ... | ११९ ६१. शान्तिपाठः | ... | ... | १२१