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मुण्डकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Mundaka Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
DevanagariHindipublished134 पृष्ठ
मन्त्रप्रतीक-सूची (परिशिष्ट)
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श्रीहरिः
मन्त्राणां वर्णानुक्रमणिका
| मन्त्रप्रतीकानि | मुं० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| अग्निर्मूर्धा चक्षुषी | २ | १ | ४ | ५२ |
| अतः समुद्रा गिरयश्च | २ | १ | ९ | ५९ |
| अथर्वणे यां प्रवदेत | १ | १ | २ | ७ |
| अरा इव रथनाभौ | २ | २ | ६ | ७० |
| अविद्यायामन्तरे | १ | २ | ८ | ३४ |
| अविद्यायां बहुधा | १ | २ | ९ | ३५ |
| आविः संनिहितम् | २ | २ | १ | ६२ |
| इष्टापूर्तं मन्यमानाः | १ | २ | १० | ३५ |
| ॐ ब्रह्मा देवानां प्रथमः | १ | १ | १ | ५ |
| एतस्माज्जायते प्राणः | २ | १ | ३ | ५० |
| एतेषु यश्चरते | १ | २ | ५ | ३० |
| एषोऽणुरात्मा चेतसा | ३ | १ | ९ | १०० |
| एह्येहीति तमाहुतयः | १ | २ | ६ | ३१ |
| कामान्यः कामयते | ३ | २ | २ | १०४ |
| क्रियावन्तः श्रोत्रियाः | ३ | २ | १० | ११७ |
| काली कराली च | १ | २ | ४ | २९ |
| गताः कलाः पञ्चदश | ३ | २ | ७ | ११३ |
| तत्रापरा, ऋग्वेदः | १ | १ | ५ | १२ |
| तदेतत् सत्यमृषिः | ३ | २ | ११ | ११९ |
| तदेतत् सत्यं मन्त्रेषु | १ | २ | १ | २४ |
| तदेतत् सत्यं यथा | २ | १ | १ | ४४ |
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( २ )
| मन्त्रप्रतीकानि | मुं० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| तपसा चीयते ब्रह्म | १ | १ | ८ | १९ |
| तपःश्रद्धे ये ह्युपवसन्ति | १ | २ | ११ | ३६ |
| तस्माच्च देवा बहुधा | २ | १ | ७ | ५६ |
| तस्मादग्निः समिधः | २ | १ | ५ | ५४ |
| तस्मादृचः साम यजूंषि | २ | १ | ६ | ५५ |
| तस्मै स विद्वानुपसन्नाय | १ | २ | १३ | ४२ |
| तस्मै स होवाच | १ | १ | ४ | ११ |
| दिव्यो ह्यमूर्तः पुरुषः | २ | १ | २ | ४६ |
| द्वा सुपर्णा सयुजा | ३ | १ | १ | ८३ |
| धनुर्गृहीत्वौपनिषदम् | २ | २ | ३ | ६६ |
| न चक्षुषा गृह्यते | ३ | १ | ८ | ९८ |
| न तत्र सूर्यो भाति | २ | २ | १० | ७८ |
| नायमात्मा प्रवचनेन | ३ | २ | ३ | १०६ |
| नायमात्मा बलहीनेन | ३ | २ | ४ | १०८ |
| परीक्ष्य लोकान्कर्मचितान् | १ | २ | १२ | ३९ |
| पुरुष एवेदं विश्वम् | २ | १ | १० | ६० |
| प्लवा ह्येते अदृढा | १ | २ | ७ | ३२ |
| प्रणवो धनुः शरः | २ | २ | ४ | ६७ |
| प्राणो ह्येष यः सर्वभूतैः | ३ | १ | ४ | ८८ |
| बृहच्च तद्दिव्यम् | ३ | १ | ७ | ९६ |
| ब्रह्मैवेदममृतम् | २ | २ | ११ | ८० |
| भिद्यते हृदयग्रन्थिः | २ | २ | ८ | ७५ |
| यत्तदद्रेश्यमग्राह्यम् | १ | १ | ६ | १५ |
| यथा नद्यः स्यन्दमानाः | ३ | २ | ८ | ११५ |
| यथोर्णनाभिः सृजते | १ | १ | ७ | १८ |
| यदर्चिमद्यदणुभ्यः | २ | २ | २ | ६४ |
| यदा पश्यः पश्यते | ३ | १ | ३ | ८७ |
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( ३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | मुं० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| यदा लेलायते ह्यर्चिः | १ | २ | २ | २६ |
| यं यं लोकं मनसा | ३ | १ | १० | १०१ |
| यः सर्वज्ञः सर्वविद्यस्य | १ | १ | ९ | २१ |
| ,, ,, | २ | २ | ७ | ७२ |
| यस्मिन्द्यौः पृथिवी | २ | २ | ५ | ६९ |
| यस्याग्निहोत्रमदर्शम् | १ | २ | ३ | २७ |
| वेदान्तविज्ञानसुनिश्चितार्थाः | ३ | २ | ६ | ११० |
| शौनको ह वै महाशालः | १ | १ | ३ | ८ |
| सत्यमेव जयति | ३ | १ | ६ | ९४ |
| सत्येन लभ्यस्तपसा | ३ | १ | ५ | ९२ |
| सप्त प्राणाः प्रभवन्ति | २ | १ | ८ | ५७ |
| समाने वृक्षे पुरुषः | ३ | १ | २ | ८५ |
| स यो ह वै तत्परमम् | ३ | २ | ९ | ११६ |
| स वेदैतत्परमम् | ३ | २ | १ | १०३ |
| संप्राप्यैनमृषयः | ३ | २ | ५ | १०६ |
| हिरण्मये परे कोशे | २ | २ | ९ | ७६ |