नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 221
नष्टे मृते प्रव्रजिते क्लीवे च पतिते पतौ। पञ्चस्वापत्सु नारीणां पतिरन्यो विधीयते॥ 97 ॥ निम्नोक्त पांच स्थितियों में स्त्री को वर्तमान पति का परित्याग तथा दूसरे पुरुष के वरण का अधिकार है—
- पति का सन्तानोत्पादन में असमर्थ होना, अर्थात् उसके शुक्र में सन्तान उत्पन्न करने वाले कीटाणुओं का न होना।
- पति का असमय में परलोक सिधारना।
- पति द्वारा गृहत्याग कर विरक्त-संन्यासी बन जाना।
- पति का नपुंसक सिद्ध होना, अर्थात् उसका यौन भोग न कर पाना अथवा पत्नी को तृप्त-सन्तुष्ट न कर पाना तथा
- निन्दित कर्मों के कारण समाज द्वारा अपनी जाति से बहिष्कृत हो जाना। अष्टौ वर्षाण्युदीक्षेत ब्राह्मणी प्रोषितं पतिम्। अप्रसूता तु चत्वारि परतोऽन्यं समाश्रयेत्॥ 98 ॥ क्षत्रिया षट् समास्तिष्ठेदप्रसूता समात्रयम्। वैश्या प्रसूता चत्वारि द्वे वर्षेत्वितरा वसेत्॥ 99 ॥ पति के विदेश जाने पर उसकी कोई खोज-ख़बर न मिलने पर प्रसूता (सन्तानवती) ब्राह्मणी, क्षत्रिया और वैश्या स्त्री को क्रमशः आठ, छह और चार वर्षों तक उसके लौटने की, सुध-ख़बर देने की तथा निस्सन्तान ब्राह्मणी, क्षत्रिया और वैश्या को क्रमशः चार, तीन और दो वर्षों तक पति के लौटने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। इस अवधि तक कुछ भी पता न चलने पर स्त्री दूसरा विवाह करने को स्वतन्त्र है। न शूद्रायाः स्मृतः काल एष प्रोषितयोषिताम्। जीवति श्रूयमाणे तु स्यादेष द्विगुणो विधिः॥ 100 ॥ शूद्रा स्त्री के पति के विदेश जाने पर, उसके लौटने और प्रतीक्षा का कोई समय निर्धारित नहीं है। विदेश गये पति के जीवित होने का निश्चय होने पर वैश्या निर्धारित समय—निस्सन्तान वैश्या के लिए दो वर्ष तथा सन्तानवती वैश्या के लिए चार वर्ष—से दुगुने वर्ष, अर्थात् सन्तानवती शूद्रा को आठ वर्षों तक और सन्तानहीना को चार वर्षों तक अपने पति के लौटने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। अप्रवृत्तौ तु भूतानां सृष्टिरेषा प्रजापतेः। अतोऽन्यगमने स्त्रीणामेष दोषो न विद्यते॥ 101 सन्तान के न होने पर आधे समय तक विदेश गये पति की प्रतीक्षा करने के औचित्य का आधार—सन्तान के लिए ही विवाह का किया जाना—है। जब सन्तान ही नहीं है और विदेश गया पति अपने लौटने की खोज ख़बर ही नहीं देता, तो नारदस्मृति / 219