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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 102

१५653 पद्मावत । १०१ माता पिता जन्म कित पाला । जो अस फंद अमों घाला ॥ धर्त्ती स्वर्ग मिले हत दोऊ । कितनिरारे करदीन्ह बिछोऊ ॥ पदक पद्वारथ कर हुतखोवा । टूटहिं रतनें रतनतस रोवा ॥ गंगन मेघ जस वर्षहिं भली । धर्त्ती पूर सलिलं होय चली ॥ सायरं उवटशिखरकी पौटी। चढ़ीपानि पाहने हिये फाटी ॥ बूँद पानि होय होय सब गिरे। प्रेम फन्द कोऊ जन परे ॥ दो० तसरोवे जस जिव जरै, गिरै रकत औ मांस । रोम रोम सब रोवहिं, सूंतै सूत भर आंस ॥ रोवत बूड़ उठा संसारू । महादेव तब भयो मयारू ॥ कहसि न रोव बहुत तैं रोवा। अब ईश्वर भा दारिद्र खोवा॥ जो दुख सहै होय सुखओका । दुखबिनसुखनजायशिवलोका॥ अब तू सिद्धै भया सुख पाई। दर्पण कयौँ छूटिगइ काई ॥ कहूं बात अबहूं उपदेशी । लाग पंथैं भूले परदेशी ॥ जौ लहि चोर सेंध नहिं देई । राजा केर न मूसै पेई ॥ चढ़े तो जाय पार वह खूंदी । परै तो सेंध शीश सों सूंदी ॥ दो० कहूंतोहिं सिंहलगढ़हि, है खंड सात चढ़ाव । फिरा न कोई जीते जिय, स्वर्ग पंथदे पांव ॥ गढ़ तसवाकैँ जैसतोर कार्यां । पुरुष देखि ओहीकी छाया ॥ पाई नाहिं जूझ हठ कीन्हे । नें पावा तैं आपहिं चीन्हे ॥ गर्दन १ ज़मीन २ आसमान ३-८-२५ अलग ४ लाल वा जवाहर ५ हाथ ६ आंख ७ पानी ६ तालाब १० धोबी का पाटा ११ पत्थर १२ छाती १३ खून १४ सूराख १५ मेहरबानी करनेवाले १६ कामिल १७ आईना १८ बदन १६-२८ नसीहत २० राह २१ पूंजी २२ खाई २३ शिर २४ क़िला तथा बदन आदमी २६ पेंचदार २७ मर्द २६ ॥