भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

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[ १२ ] ब्रह्मानन्दान्तर्गत आत्मानन्द का संक्षेप योगी लोग तो योग के द्वारा निजानन्द को पा ही लेंगे, पर जिनकी योग में गति नहीं है वे इस आत्मानन्द को कैसे जानें ? इसी प्रश्न का उत्तर यह है कि हम चाहे जितनी उदारता दिखायें सर्वसाधारण तो इस गहन बात को समझ ही नहीं सकेंगे । इस मार्ग द्वारा उनका तिल भर भी उपकार नहीं हो सकेगा । वे जिस प्रवृत्ति मार्ग में लगे हैं उनके लिए वही ठीक है । प्रवृत्ति मार्ग की दुःखपरम्परा से ही तो आत्मजिज्ञासा जागा करती है । संसारनदी के प्रवाह को रोक कर खड़ी हो जाने वाली बाधायें जब तक किसी के सामने आकर खड़ी नहीं हो जातीं तब तक किसी के भी हटाने से प्रवृत्ति मार्ग छोड़ा नहीं जाता । यह तो अपने अनु- भव से ही शिक्षा मिलने पर छूटता है और तब निवृत्ति आकर ज्ञान की उत्पत्ति कर देती है । प्रवृत्ति से जिज्ञासा होती है और निवृत्ति से ज्ञान हो जाता है । यों आप उन प्रवृत्तिमार्गियों को व्यर्थ फँसा हुआ मत समझो । इस संसार नाम की पाठशाला में सभी अपनी अपनी शक्ति के अनुसार शिक्षण ले रहे हैं । इसमें जल्दी का प्रश्न थोड़ा सा भी नहीं है । उन्हें तो उनके अधिकार के अनुसार कर्म या उपासना में ही लगा देना श्रेयस्कर होगा । हर किसी को आत्मानन्द की बात बताना ठीक नहीं है । आवश्यकता से पहले दी हुई चीज़ से लाभ के स्थान में हानि होती है । हां,