फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९ वंश आगे न चलने के योग-दत्तक पुत्र योग-पुत्रनाश योग-बहु पुत्र योग- गर्भ रहने का समय-संतान संख्या योग-संतान होगी या नहीं इसके योग तिथि, करण आदि दोषों के कारण सन्तति न होने से उपाय-पुत्र प्राप्ति समय-दशा, अन्तर्दशा तथा गोचर विचार । पृ० २३१-२४९ १३. तेरहवाँ अध्याय : आयुर्दाय । जन्म का समय कौन सा लिया जावे इसमें मत भेद-१२ वर्ष की वय तक बालारिष्ट तथा माता-पिताओं के ग्रह का विशेष प्रभाव- योगारिष्ट-अल्पायु-मध्यायु-दीर्घायु-दिन मृत्यु-दिन रुक्-विषघटी-बालमृत्यु के योग-लग्न-चन्द्र द्रेष्काण-लग्नेश चन्द्रेश नवांश-लग्नेश चन्द्रेश द्वादशांश अल्प-मध्य-दीर्घायु के योग-केन्द्रादि स्थिति से आयु विचार, रंध्राधीश का विशेष विचार-लग्नेश, लग्नेश नवांश स्वामी-चन्द्रराशीश-चन्द्र नवांश स्वामी के बलाबल से आयु निर्णय-अल्पायु-मध्यायु-दीर्घायु में नाश का समय-अन्य योग । पृ० २५०-२६४ १४. चौदहवाँ अध्याय : रोगनिर्णय । रोग विचार-सूर्य, चन्द्र-मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु प्रत्येक ग्रह के पीड़ाकारक होने से कौन-कौन से रोग होंगे-किस रोग से मृत्यु होगी-प्रत्येक ग्रह जनित रोग जिससे मृत्यु हो-अष्टम भाव में जो राशि हो, उसके रोग जो मृत्यु करें-शस्त्र, विष आदि से मृत्यु-क्लेश पूर्वक मरण-सुख से मृत्यु-जीवन के बाद जातक की परलोक गति-शीर्षोदय, पृष्ठोदय राशि वश विचार-पूर्व जन्म का वृत्त-पिछले जीवन में मनुष्य, पशु, पक्षी, वृक्ष लता आदि में जन्म-भविष्य जन्म किस योनि में होगा- स्वदेश या परदेश में, भविष्य में जन्म । पृ० २६५-२८४