भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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विषयानुक्रमणिका १. प्रथम अध्याय : राशि भेद । मंगलाचरण-जन्म समय का ठीक ज्ञान-काल पुरुष के अंगों का राशिचक्र से समन्वय-राशियों के स्थान तथा स्वामी-ग्रहों की उच्च राशियाँ, परमोच्च अंश, नीच राशि तथा परम नीच अंश-मनुष्य, चतुष्पद,कीट, जलचर संज्ञा-पृष्ठोदय, शीर्षोदय उभयोदय-दिवाबली रात्रिबली-राशियों की नर आदि संज्ञा-द्वार, बाह्य-धातु-क्रूर, सौम्य आदि विवरण तथा दिशाएँ- किस भाव से क्या विचारना । पृ० १७-२९ २. दूसरा अध्याय : ग्रह भेद । सूर्य, चंद्र, मंगल बुध बृहस्पति, शुक्र, शनि किन-किन के कारक होते हैं-इनसे क्या-क्या विचार करना-ग्रहों के स्वरूप, गुण, प्रकृति- ग्रहों की दिशा-उनके धातु, स्थान, पक्षी, वृक्ष-ग्रहों के नैसर्गिक तथा तात्कालिक मित्र, शत्रु आदि-उनके काल, जाति गुण, ऋतु, अन्न, देश, रत्न-पापत्व और शुभत्व । पृ० ३०-५३ ३. तीसरा अध्याय : वर्ग विभाग । दशवर्ग-राशि, होरा, द्रेष्काण, पंचमांश, सप्तमांश, नवांश, दशमांश- द्वादशांश, षोडशाँश-षष्टिअंश-दशवर्ग चक्र-किस वर्ग से क्या विचार करना