भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 16

१४ सूचीपत्र । पृष्ठ ४ शाह का यह समाचार सुन कर क्रोध करना ॥ ... ... ... ३८६ ५ हुसेन का शाह की बात न मानना और शाह का आज्ञा देना कि या तो मेरा राज्य छोड़ दो नहीं मारे जाओगे ॥ ... ... ... ... " ६ मीर हुसेन का देश छोड़ कर परिवार आदि के साथ नागौर की ओर आना ॥ ... ३८७ ७ मीर हुसेन का पृथ्वीराज के यहां आना ॥ ... % ... " ८ मीर हुसेन को आदर के साथ पृथ्वीराज का बुलाना और मीर का आकर सलाम करना ॥ " ९ पृथ्वीराज का शिकार खेलना और मीर हुसेन का सुन्दरदास को पृथ्वीराज के पास भेजना ॥ ३८८ १० सुन्दर छाया का स्थान देख कर मीर का डेरा डालना ॥ ... ... ... " ११ हरम (स्त्रियों) का डेरा पीछे की ओर डालना ॥ ... " १२ सुन्दर दास का पृथ्वीराज के पास जाना, पृथ्वीराज का मीर का कुशल समाचार पूछना और उसका सब हाल कहना ॥ ... ... ... " १३ मंत्री, कैमास, चन्द, पुंडीर आदि को बुलाकर पृथ्वीराज का पूछना कि क्या करें क्योंकि दोनों तरह विपत्ति है एक शाह का कोप दूसरे शरण आए को न रखना धर्म विरुद्ध है ॥ ३८६ १४ चन्द का सलाह देना कि जैसे शरणागत होने पर विष्णु भगवान ने मत्स्य रूप धर कर पृथ्वी को अपनी सींग पर रक्खा था वैसेही आप भी कीजिए ॥ ... ... ... " १५ जैसे शिवजी गले में विष धारण किए हैं वैसे ही मीर को आप भी रखिए ॥... ३६० १६ सुन्दरदास से पूछना कि सब स्त्रियां तो सुख से हैं और शाह से झगड़ा होने की बात क्या सच है ॥ " १७ सुन्दरदास का कहना कि घूर की ऐसी एक पातुर शहाबुद्दीन के पास थी उस को लेकर हुसेन यहां चौहान की शरण में आया है ॥ ... ... ... " १८ चन्द का पृथ्वीराज की प्रशंसा करना कि जैसे मोरध्वज के यहां अर्जुन ब्राह्मण बनकर शरण में गया, भगवान ने सिंह बन कर मांस मांगा, शरणागत द्रोपदी का चीर बढ़ाया, वैसेही तुमने शरणागत को रखकर क्षत्रिय धर्म की रक्षा की तुम्हारे माता पिता धन्य हैं ॥ ... ... " १९ शाहहुसेन का पृथ्वीराज से मिलना, पृथ्वीराज का आदर देना ॥ ... ... ३६१ २० हुसेन को दक्षिण की ओर नागौर की जागीर देना ॥ ... ... ... " २१ पृथ्वीराज का हुसेन को घोड़े हाथी आदि देना और दोनों का परस्पर प्रेम बढ़ना ॥ ... " २२ शहाबुद्दीन का चार दूत अजमेर भेजना ॥ ... ... ... ३६२ २३ पृथ्वीराज का हुसेन को कैथल हांसी हिसार का पर्गना देना और शिकार में साथ रखना, यह सब समाचार दूतों का शहाबुद्दीन से कहना ॥ ... ... ... ३६२ २४ शहाबुद्दीन का क्रोध करना और अरबखां को पृथ्वीराज के पास भेजना कि भला चाहो तो हुसेन को निकाल दो ॥ ... ... ... ... ३६३ २५ अरबखां से कहना कि पहिले हुसेन के पास जाना जो वह पातुर को दे दे तो हम क्षमा कर देंगे, जो वह गर्व करके न माने तो पृथ्वीराज के पास जाकर हमारा पत्र देकर समझाना ॥ " २६ तीन सौ सवार और रथ देकर अरबखां को रवाना करना ॥ ... ... ... ३६४ २७ एक महीने में अरबखां का नागौर पहुंचना ॥ ... ... ... " २८ अरबखां का हुसेन से मिलकर समझाना, हुसेन का न मानना ॥ ... ... " २९ अरबखां का पृथ्वीराज के पास जाना ॥ ... ... ... " ३० पृथ्वीराज का सुलतान की कुशल पूछना ॥ ... ... ... " ३१ अरबखां का कहना कि हुसेनखां को निकाल देने के लिये सुलतान ने कहा है ॥ ... ३६५ ३२ शहाबुद्दीन का संदेसा सुनकर पृथ्वीराज का मुख लाल होगया भौहें चढ़ गईं ॥ ... " ३३ कैमास ने डपट कर कहा कि आर्य लोगों का धर्म सुलतान नहीं जानता इससे ऐसा कहता है, हुसेन पृथ्वीराज के शरणागत है, चत्री का धर्म उसे छोड़ने का नही है ॥ ... ... " ३४ कन्ह चौहान, सूरसिंह, गोयंदराज चन्द, पुंडीर आदि का भी यही कहना और सुलतान से लड़ने को हम प्रस्तुत हैं यह कहना ॥ ... ... ... ... " ३५ अ. रखां. का अपना निरादर होता देख उठ आना और ग़ज़नौ को कूच करना तथा शहाबुद्दीन से सब समाचार कहना ॥ ... ... ... ... ३६६ ३६ दर्बार करके शहाबुद्दीन का तातारखां, अरबखां, मीरजमाम, कमाम, खुरासाखां, रचनमद्दनखां,