पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 9, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूचीपत्र । ७ (२) दसम समय । ( पृष्ठ १८१ से २५४ तक ) पृष्ठ हरि रूप का मंगलाचरण ॥ ... ... ... ... १८१ दशावतार का नाम स्मरण ॥ ... ... ... ... ” दशावतार की स्तुति ॥ ... ... ... ... ” ग्रन्थोक्ति । ... ... ... ... ... १८६ मत्स्यावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १८७ कच्छपावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १८६ ७ वराहावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १६३ ८ नृसिंहावतार की कथा ॥ ... ... ... ... १६६ ६ वामनावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २०२ १० परशुरामावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २०५ ११ रामावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २१० १२ कृष्णावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २१८ १३ बौद्धावतार की कथा ॥ ... ... ... ... २५२ १४ कल्कि अवतार की कथा ॥ ... ... ... ... २५३ १५ उपसंहार का कथन ॥ ... ... ... ... २५४
( ३ ) दिल्ली किल्ली कथा । ( पृष्ठ २५५ से पृष्ठ २७४ तक ) १ मंगलाचरण ॥ ... ... ... ... २५५ २ चंद का अपनी स्त्री को कहना कि अनंगपाल की पुत्री को पुत्र उत्पन्न होने से दिल्ली की पूर्व कथा का प्रसंग प्राप्त हुआ है ॥ ... ... ... ... ” ३ बालकपन में पृथ्वीराज का दिल्ली प्राप्त करने का स्वप्न देखना ॥ ... ... २५६ ४. पृथ्वीराज की माता का उससे स्वप्न का वृत्तान्त पूछना ॥ ... ... ” ५ पृथ्वीराज का माता को स्वप्न का वृत्तान्त कहना ॥ ... ... ” ६ पृथ्वीराज की माता का स्वप्न वृत्तान्त सुन अद्भुत रस में रंजित होना ॥ ... ... २५७ ७ उसका ज्योतिषियों को बुला स्वप्न का सत्यफल पूछना ॥ ... ... ” ८ ज्योतिषियों का उत्तर देना कि पृथ्वीराज दिल्ली का राजा होगा ॥ ... ... ” ६ ज्योतिषियों को विदा कर माता और पुत्र का एक गृह में जा बैठना ॥ ... ... २५८ \Bigg} १० अनंगपाल की पुत्री का अपने पुत्र के आगे दिल्ली की पहिली किल्ली की पूर्व कथा का कहना और \atop - राजा कल्हन का वनक्रीडा करते सृसा और स्वान के चरित्र से भूमि का धीरत्व देखना ॥ ... ” ११ उस वीर भूमि में व्यास का कील्ली गाड़ना ॥ ... ... ” १२ वहां कल्हन का कल्हनपुर बसा कर राज करना और फिर उसके कितनोक पीढ़ी पीछे अनंगपाल का होना २५६ १३ इतनी कथा सुनकर पृथ्वीराज के मन में अचरज होना ॥ ... ... ” १४ विपरीत समय का आना देख कर सकल सभा का संकित होना ॥ ... ... ” \Bigg} १५ अनंगपाल की पुत्री का अपने पुत्र ( पृथ्वीराज ) के आगे अपने पिता के फिर से दिल्ली बसाने के \atop लिये पाषाण और किल्ली गाड़ने की कथा का कहना ॥ ... ... ... ” \Bigg} १६ व्यास का कहना कि पांच घड़ी तक पाषाण को हाथ न लगाने से वह शेष के सिर पर दृढ़ हो \atop जायगा परन्तु राजा का इसे अनर्थ कर मानना ॥ ... ... ... २६० १७ साठ अंगुल की किल्ली गाड़ना अर्थात् शंकुघात कर्म करना ॥ ... ... ... ”