झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई ६ गङ्गाधरराव स्वयं अभिनय करते थे। पुरुष के अभिनय से सन्तोष नही होता था, इसलिये स्त्री की भूमिका में भी आ जाते थे। स्त्रियो का अभिनय करने के लिये उन्होने बहुत सुन्दर नाचने-गाने वाली नियुक्त कर रक्खी थी। इनमें मोतीबाई बहुत प्रसिद्ध थी। ❊ उसका सौन्दर्य अप्सरा सा था। फूलो जैसी कोमलाङ्गी। स्वरलहरी सी मोहक और चंचल। परन्तु वेश्यापुत्री होने पर भी वह कुमारी थी और नाटकशाला के बाहर पर्दे में रहती थी। बहुत कुशल अभिनेत्री थी, परन्तु इसको भी गङ्गाधरराव अपने उदाहरण से यथावत् अभिनय सिखलाते थे। गंगाधरराव की नाटकशाला में मोतीबाई छोटी उम्र में आगई थी। जो लोग गंगाधरराव की कृपा से नाटकशाला में खेल देखने जाया करते थे वे बाहर आकर उसके रूप की, नृत्य और संगीत की, उसके हाव-भाव तथा अभिनय की प्रशंसा करते नही अघाते थे। ❊ झाँसी के खेवट में वह मोतीबाई नाटकशाला वाली के नाम से विख्यात है।