भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1421, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1421

ये अभिलाषापूरक, शब्द करने वाले एवं दस उंगलियों द्वारा पकड़े हुए सोम काष्ठ से बने पात्र अर्थात् द्रोण कलश की ओर जाते हैं. (४) एष सूर्यमरोचयत् पवमानो विचर्षणिः. विश्वा धामानि विश्ववित्.. (५) ये निचोड़े जाते हुए, सबके द्रष्टा, सबको जानने वाले सोम सूर्य के साथ-साथ सभी तेजस्वी पदार्थों को दीप्त करते हैं. (५) एष शुष्म्यदाभ्यः सोमः पुनानो अर्षति. देवावीरघशंसहा.. (६) ये निचोड़े हुए सोम, शक्तिशाली, अहिंसनीय, देवों के रक्षक एवं पापनाशक होकर चलते हैं. (६) सूक्त—२९ देवता—सोम प्रास्य धारा अक्षरन्वृष्णः सुतस्यौजसा. देवाँ अनु प्रभूषतः.. (१) अभिलाषापूरक, निचोड़े हुए देवों को प्रभावित करने के इच्छुक सोम की धाराएं अपनी शक्ति से बहती हैं. (१) सप्तिं मृजन्ति वेधसो गृणन्तः कारवो गिरा. ज्योतिर्जज्ञानमुक्थ्यम्.. (२) स्तोता, यज्ञ करने वाले एवं कार्यकर्त्ता लोग दीप्तिशाली, बढ़े हुए, स्तुति योग्य एवं गतिशील सोम को स्तुतियों द्वारा शुद्ध करते हैं. (२) सुषहा सोम तानि ते पुनानाय प्रभूवसो. वर्धा समुद्रमुक्थ्यम्.. (३) हे अधिक धन के स्वामी सोम! जब तुम शुद्ध किए जाते हो, जब तुम्हारे तेज शोभा वाले बनते हैं, तब तुम स्तुति योग्य एवं समुद्र तुल्य द्रोणकलश को भरो. (३) विश्वा वसूनि सञ्जयन्पवस्व सोम धारया. इनु द्वेषांसि सध्यक्.. (४) हे सोम! समस्त धनों को हमें देने के लिए जीतते हुए धाराओं के रूप में नीचे गिरो. सभी शत्रुओं को एक साथ दूर भगाओ. (४) रक्षा सु नो अररुषः स्वनात्समस्य कस्य चित्. निदो यत्र मुमुच्महे.. (५) हे सोम! दान न करने वाले एवं अन्य सभी निंदकों से हमारी रक्षा करो. ऐसे साधन द्वारा हमारी रक्षा करो, जिससे हम मुक्त हो सकें. (५) एन्डो पार्थिवं रयिं दिव्यं पवस्व धारया. द्युमन्तं शुष्ममा भर.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*