ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1423, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंओर जा रहे हैं. (१) दिवस्पृथिव्या अधि भवेन्दो द्युम्नवर्धनः. भवा वाजानां पतिः.. (२) हे अन्नों के स्वामी सोम! तुम द्युलोक और धरती संबंधी दीप्तिशाली धन को बढ़ाने वाले बनो. (२) तुभ्यं वाता अभिप्रियस्तुभ्यमर्षन्ति सिन्धवः. सोम वर्धन्ति ते महः.. (३) हे सोम! वायु तुम्हें तृप्ति देने वाले हैं एवं नदियां तुम्हारे लिए ही बहती हैं. ये दोनों तुम्हारी महिमा बढ़ावें. (३) आ प्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्ण्यम्. भवा वाजस्य सङ्गथे.. (४) हे सोम! तुम वायु और जल की सहायता से बढ़ो. अभिलाषापूरक बल तुम्हें चारों ओर से प्राप्त हो. तुम अन्न प्राप्त कराने वाले बनो. (४) तुभ्यं गावो घृतं पयो बभ्रो दुदुहे अक्षितम. वर्षिष्ठे अधि सानवि.. (५) हे पीले रंग के सोम! गाएं तुम्हारे लिए क्षीण न होने वाला दूध-दही देती हैं. तुम बढ़े एवं ऊंचे स्थान पर बैठो. (५) स्वायुधस्य ते सतो भुवनस्य पते वयम्. इन्दो सखित्वमुश्मसि.. (६) हे शोभन आयुधों वाले एवं लोक के स्वामी सोम! हम तुम्हारी मित्रता चाहते हैं. (६) सूक्त—३२ देवता—सोम प्र सोमासो मदच्युतः श्रवसे नो मघोनः. सुता विदथे अक्रमुः.. (१) नशा करने वाले सोम निचुड़कर हव्यदाता यजमान को अन्न देने के लिए यज्ञ में जाते हैं. (१) आदीं त्रितस्य योष॑णो हरिं हिन्वन्त्यद्रिभिः. इन्दुमिन्द्राय पीतये.. (२) त्रित ऋषि की उंगलियां हरे रंग के सोम को इंद्र के पीने के लिए पत्थरों से कुचलती हैं. (२) आदीं हंसो यथा गणं विश्वस्यावीवशनन्मतिम्. अत्यो न गोभिरज्यते.. (३) हंस जिस प्रकार मानव-समूह में घुसता है, उसी प्रकार यह सोम सभी स्तोताओं की बुद्धि में प्रवेश करते हैं. जिस प्रकार घोड़े को स्नान कराते हैं, उसी प्रकार सोम जलों से सींचे ebook converter DEMO Watermarks*