ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1574, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतेषां वयं सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम.. (६) नवीन आगमन वाले अंगिरा, अथर्वा और भृगु नामक पितर सोमरस के अधिकारी हैं. हम उन यज्ञपात्र पितरों की कृपादृष्टि पावें एवं उनकी कृपादृष्टि के कारण कल्याण प्राप्त करें. (६) प्रेहि प्रेहि पथिभिः पूर्व्येभिर्यत्रा नः पूर्वे पितरः परेयुः. उभा राजाना स्वधया मदन्ता यमं पश्यासि वरुणं च देवम्.. (७) हे मेरे पिता! जिन प्राचीन मार्गों से हमारे पूर्ववर्ती पितर गए हैं, उन्हीं से तुम भी पधारो. तुम वहां स्वधा से प्रसन्न होते हुए यम एवं वरुणदेव—दोनों स्वामियों को देखो. (७) सं गच्छस्व पितृभिः सं यमेनेष्टापूर्तेन परमे व्योमन्. हित्वायावद्यं पुनरस्तमेहि सं गच्छस्व तन्वा सुवर्चाः.. (८) हे मेरे पिता! तुम उत्तम स्वर्ग में जाकर अपने पितरों से, यम से और अपने श्रौत, स्मार्त कर्मों के फलों से मिलो. तुम अपना पाप छोड़कर म्रियमान नामक घर में आओ एवं शोभन दीप्ति वाले शरीर से मिलो. (८) अपेत वीत वि च सर्पतातोऽस्मा एतं पितरो लोकमक्रन्. अहोभिरद्भिरक्तुभिर्व्यक्तं यमो ददात्यवसानमस्मै.. (९) हे श्मशान पर रहने वाले पिशाचो! यहां से चले जाओ, हट जाओ. पितरों ने इस स्थान को हमारे इस मरे हुए यजमान के लिए बनाया है. यम ने दिवसों, जलों और रात्रियों से युक्त यह स्थान इस मरने वाले को दिया है. (९) अति द्रव सारमेयौ श्वानौ चतुरक्षौ शबलौ साधुना पथा. अथा पितृन्त्सुविदत्राँ उपेहि यमेन ये सधमादं मदन्ति.. (१०) हे अग्नि! तुम सरमा के पुत्र, चार आंखों वाले एवं चितकबरे दो कुत्तों को पार करके उत्तम मार्ग के द्वारा जाते हुए यम के साथ प्रसन्न रहने वालों एवं शोभनज्ञानसंपन्न पितरों के समीप जाओ. (१०) यौ ते श्वानो यम रक्षितारौ चतुरक्षौ पथिरक्षी नृचक्षसौ. ताभ्यामेनं परि देहि राजन्त्स्वस्ति चास्मा अनमीवं च धेहि.. (११) हे स्वामी यम! जो तुम्हारे घर के रक्षक, चार आंखों वाले, मार्ग की रक्षा करने वाले एवं मनुष्यों द्वारा प्रशंसित दो कुत्ते हैं, उनसे इस मृत व्यक्ति की रक्षा करो एवं इसे कल्याण एवं रोगहीनता दो. (११) ebook converter DEMO Watermarks*