भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1575

उरूणसावसुतृपा उदुम्बलौ यमस्य दूतौ चरतो जनाँ अनु. तावस्मभ्यं दृशये सूर्याय पुनर्दातामसुमद्येह भद्रम्.. (१२) लंबी नाक वाले, दूसरों के प्राणों से तृप्त होने वाले, अत्यंत बली एवं यम के दूत जो दो कुत्ते हैं, वे आज हमें सूर्य का दर्शन करने के लिए यहां कल्याणकारी प्राण दें. (१२) यमाय सोमं सुनुत यमाय जुहुता हवि:. यमं ह यज्ञो गच्छत्यग्निदूतो अरङकृत:.. (१३) हे ऋत्विजो! यम के लिए सोमरस निचोड़ो तथा हवि का होम करो. अग्नि को दूत बनाने वाला एवं अलंकृत यज्ञ यम के पास जाता है. (१३) यमाय घृतवद्धविर्जुहोत प्र च तिष्ठत. स नो देवेष्वा यमद्दीर्घमायु: प्र जीवसे.. (१४) हे ऋत्विजो! यम के लिए घी वाला हवि होम करो एवं उनकी सेवा करो. यम देव हमें लंबा जीवन बिताने के लिए अधिक आयु दें. (१४) यमाय मधुमत्तमं राज्ञे हव्यं जुहोतन. इदं नम ऋषिभ्य: पूर्वजेभ्य: पूर्वेभ्य: पथिकृद्भ्य:.. (१५) हे ऋत्विजो! स्वामी यम के लिए अत्यंत मधुर हवि का होम करो. हमारे जिन पूर्वज ऋषियों ने पहले यह मार्ग बनाया है, उनके लिए नमस्कार है. (१५) त्रिकद्रुकेभि: पतति षळुर्वीरिकमिद्बृहत्. त्रिष्टुब्गायत्री छन्दांसि सर्वा ता यम आहिता.. (१६) यम त्रिकद्रुक नामक यज्ञ को प्राप्त करते हैं, छ: स्थानों में रहते हैं एवं एक विस्तृत संसार में घूमते हैं. त्रिष्टुप्, गायत्री आदि सब छंद यम की स्तुति में प्रयुक्त हैं. (१६) सूक्त—१५ देवता—पितृलोक उदीरतामवर उत्परास उन्मध्यमा: पितर: सोम्यास:. असुं य ईयुरवृका ऋतज्ञास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु.. (१) उत्तम, मध्यम और अधम—तीनों श्रेणियों के पितर कृपा करते हुए हमारा हवि ग्रहण करें. हमारी हिंसा न करने वाले और हमारे यज्ञों को जानने वाले जो पितर हमारी प्राणरक्षा करने आए हैं, वे यज्ञों में हमारी रक्षा करें. (१) इदं पितृभ्यो नमो अस्त्वद्य ये पूर्वांसो य उपरास ईयु:. ये पार्थिवे रजस्या निषत्ता ये वा नूनं सुवृजनासु विक्षु.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*