ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1841, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—१६९ देवता—गौ मयोभूर्वातो अभि वातूस्त्रा ऊर्जस्वतीरोषधीरा रिशन्ताम्. पीवस्वतीर्जीवधन्याः पिबन्त्ववसाय पद्धते रुद्र मृळ.. (१) आनन्ददायिनी वायु गायों की ओर चलें. गाएं शक्ति देने वाली घास खावें एवं अधिक मात्रा में जल पिएं. हे इंद्र! चरणों वाली तथा अन्नरूपिणी गायों की रक्षा करो. (१) याः सरूपा विरूपा एकरूपा यासामग्निरिष्ट्या नामानि वेद. या अङ्गिरसस्तपसेह चक्रुस्ताभ्यः पर्जन्य महि शर्म यच्छ.. (२) जो गाएं समान रूप वाली, विभिन्न रूप वाली तथा एक रूप वाली हैं, उन गायों के नाम अग्नि यज्ञ के कारण जानते हैं. अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने तपस्या के द्वारा धरती पर गायों का निर्माण किया है. हे पर्जन्य! उन गायों को सुख प्रदान करो. (२) या देवेषु तन्व१मैरयन्त यासां सोमो विश्वा रूपाणि वेद. ता अस्मभ्यं पयसा पिन्वमानाः प्रजावतीरिन्द्र गोष्ठे रिरीहि.. (३) हे इंद्र! जो गाएं देवसंबंधी यज्ञों के निमित्त अपना शरीर देती हैं एवं सोम जिनके दूध, दही, घृत आदि रूपों को जानते हैं, उन्हें दूध से भरकर तथा संतान युक्त बनाकर हमारे यज्ञ में भेजो. (३) प्रजापतिर्मह्यमेता रराणो विश्वैर्देवैः पितृभिः संविदानः. शिवाः सतीरुप नो गोष्ठमाकस्तासां वयं प्रजया सं सदेम.. (४) प्रजापति ने समस्त देवों एवं पितरों से सलाह करके मुझे ये गाएं प्रदान की हैं. वे इन गायों को कल्याणरूपिणी बनाकर हमारी गोशाला में रखते हैं, जिससे हम गायों के बच्चे पा सकें. (४) सूक्त—१७० देवता—सूर्य विभ्राड् बृहत्पिबतु सोम्यं मध्वायुर्दधद्यज्ञपतावविह्रुतम्. वातजूतो यो अभिरक्षति त्मना प्रजाः पुपोष पुरुधा वि राजति.. (१) विशेष दीप्ति वाले सूर्य यजमान को अकुटिल आयु देते हुए मधुर सोमरस अधिक मात्रा में पिएं. सूर्य वायु द्वारा प्रेरित होकर प्रजा की रक्षा करते हैं एवं उसका पोषण करते हुए विशेष रूप से सुशोभित होते हैं. (१) विभ्राड् बृहत्सुभृतं वाजसातमं धर्मन्दिवो धरुणे सत्यमर्पितम्. ebook converter DEMO Watermarks*