ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 539, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमित्र आदि सुंदर पुत्रों की माता अदिति हमें शत्रुओं को पराभव करने वाले मार्ग से ले चलें. हम अनेक वीर पुत्रों से युक्त एवं अन्यों द्वारा अहिंसित होकर मित्र तथा वरुण का सुख प्राप्त करें. (७) तिस्रो भूमीर्धारयन् त्रीँरुत द्यून्त्रीणि व्रता विदथे अन्तरेषाम्. ऋतेनादित्या महि वो महित्वं तदर्यमन्वरुण मित्र चारु.. (८) अदितिपुत्र धरती, आकाश, स्वर्ग तीनों लोकों एवं अग्नि, वायु, सूर्य तीनों तेजों को धारण करते हैं तथा इनके यज्ञों में तीन व्रत स्थिर हैं. हे आदित्यो! यज्ञ से तुम्हारी महिमा बढ़ी है. हे अर्यमा, वरुण एवं मित्र! तुम्हारा महत्त्व सुंदर है. (८) त्री रोचना दिव्या धारयन्त हिरण्ययाः शुचयो धारपूताः. अस्वप्नजो अनिमिषा अदब्धा उरुशंसा ऋजवे मर्त्याय.. (९) स्वर्णाभूषण धारण करने वाले, दीप्तियुक्त, पवित्र, निद्रारहित, निमेषहीन, असुरों द्वारा अहिंसित एवं सब लोगों द्वारा स्तुति योग्य अदितिपुत्र सरल मनुष्यों के लिए अग्नि, वायु एवं सूर्य तीन तेज धारण करते हैं. (९) त्वं विश्वेषां वरुणासि राजा ये च देवा असुर ये च मर्ताः. शतं नो रास्व शरदो विचक्षेऽश्यामायूंषि सुधितानि पूर्वा.. (१०) हे वरुण! चाहे असुर हों, देव हों अथवा मनुष्य हों, तुम सबके राजा हो. हमें सौ वर्ष तक देखने की शक्ति दो. हम पूर्वजों द्वारा भोगी हुई अवस्था को प्राप्त करें. (१०) न दक्षिणा वि चिकिते न सव्या न प्राचीनमादित्या नोत पश्चा. पाक्या चिद्वसवो धीर्या चद्युष्मांनीतो अभयं ज्योतिरश्याम्.. (११) हे वासदाता अदितिपुत्रो! हम दायां, बायां, सामने, पीछे कुछ भी नहीं जानते. मुझ अपरिपक्व ज्ञान एवं धैर्यरहित को यदि तुम उत्तम मार्ग से ले जाओगे तो मैं भयरहित ज्योति पाऊंगा. (११) यो राजभ्य ऋतनिभ्यो ददाश यं वर्धयन्ति पुष्टयश्च नित्याः. स रेवान्याति प्रथमो रथेन वसुदावा विदथेषु प्रशस्तः.. (१२) जो यजमान सुशोभित एवं यज्ञ के नेता आदित्यों को हव्य देता है तथा पोषक आदित्य जिसको नित्य बढ़ाते हैं, वही धन का स्वामी, प्रसिद्ध, धन दान करने वाला एवं सब लोगों की प्रशंसा करके रथ के द्वारा यज्ञस्थल में आता है. (१२) शुचिरपः सूयवसा अदब्ध उप क्षेति वृद्धवयाः सुवीरः. नकिष्टं घ्नन्त्यन्तितो न दूराद्य आदित्यानां भवति प्रणीतौ.. (१३) ebook converter DEMO Watermarks*