भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 154, कुल 310 में से

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पृष्ठ 154

चौथा अध्याय पहला खंड एते असृग्रमिन्दवस्तिरः पवित्रमाशवः. विश्वान्यभि सौभगा.. (१) हे सोम! आप तेजी से छलनी की ओर भाग रहे हैं. यजमान अपने सौभाग्य के लिए आप को परिष्कृत कर रहे हैं. (१) विघ्नन्तो दुरिता पुरु सुगा तोकाय वाजिनः. त्मना कृण्वन्तो अर्वतः.. (२) हे सोम! आप शक्तिदाता, पापनाशी व हमारी पीढ़ियों को पशु धन देते हैं. आप अपना मार्ग स्वयं निर्मित करते हैं. (२) कृण्वन्तो वरिवो गवे ऽ भ्यर्थन्ति सुष्टुतिम्. इडामस्मभ्य ꣳ संयतम्.. (३) हे सोम! आप हमें धन प्रदान करते हैं. आप हमारी गायों के लिए भी श्रेष्ठ धन प्रदान करते हैं. आप पालने वाले हैं. आप हमारी प्रार्थनाओं को स्वीकार कीजिए. (३) राजा मेधाभिरीयते पवमानो मनावधि. अन्तरिक्षेण यातवे.. (४) हे सोम! आप राजा हैं. हम बुद्धि से आप की उपासना करते हैं. आप अंतरिक्ष में भ्रमण करते हैं. आप द्रोणकलश में स्थित रहते हैं. (४) आ नः सोम सहो जुवो रूपं न वर्चसे भर. सुषवाणो देववीतये.. (५) हे सोम! आप को देवीदेवताओं के उपयोग के लिए परिष्कृत किया जाता है. आप हमें भरपूर रूप, वर्चस्व (प्रभाव) व तेज प्रदान कीजिए. (५) आ न इन्द्रो शातग्विनं गवां पोष ꣳ स्वश्व्यम्. वहा भगत्तिमूतये.. (६) हे सोम! आप हमें सैकड़ों गाएं व घोड़े प्रदान कीजिए. आप उन सब का पालनपोषण करने में सक्षम हैं. आप हमें भाग्यशाली बनाने की कृपा कीजिए. (६) तं त्वा नृम्णानि बिभ्रत ꣳ सधस्थेषु महो दिवः. चारु ꣳ सुकृत्येमहे.. (७) हे सोम! आप स्वर्गलोक के महान वैभव से संपन्न हैं. आप चारु (सुंदर) हैं. आप को हम अपने सुकर्मों से पाना चाहते हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (७) संवृक्त धृष्णुमुक्थ्यं महामहिव्रतं मदम्. शतं पुरो रुरुक्षणिम्.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*

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