सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 158, कुल 310 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सोम! आप हमारे हित हेतु परिष्कृत होने की कृपा कीजिए. आप पवित्र होइए. आप हमारा कल्याण कीजिए. आप हमें श्रेष्ठ बुद्धि दीजिए. आप हमारी प्रार्थना स्वीकारिए. आप इंद्र को तृप्त कीजिए. (६) चौथा खंड यद्याव इन्द्र ते शत २४ शतं भूमीरुत स्युः. न त्वा वज्रिन्त्सहस्र २४ सूर्या अनु न जातमष्ट रोदसी.. (१) हे इंद्र! सैकड़ों भूमि, सैकड़ों सूर्य और सैकड़ों लोक भी आप की महिमा के बराबर नहीं हो सकते. आप जैसा अब तक कोई उत्पन्न नहीं हुआ. भूमंडल और अंतरिक्षमंडल तक में आप की समानता कोई नहीं कर सकता. (१) आ पप्राथ महिना वृष्ण्या वृषन्विश्वा शविष्ठ शवसा. अस्माँ अव मघवन् गोमति व्रजे वज्रिं चित्राभिरूतिभिः.. (२) हे इंद्र! आप बलवान, सामर्थ्यवान व मनोकामनाएं पूरी करने वाले हैं. आप धनवान, वज्रधारी व श्रेष्ठ मतिवान हैं. आप अपने रक्षा साधनों के साथ पधारिए. आप गायों से भरे हुए बाड़े प्रदान कीजिए. (२) वयं घ त्वा सुतावन्त आपो न वृत्तबर्हिषः. पवित्रस्य प्रस्रवणेषु वृत्रहन्नपरि स्तोतार आसते.. (३) हे इंद्र! आप शत्रुनाशी हैं. हम सोमरस को जलप्रवाह की भांति आप के पास प्रवाहित कर के लाते हैं. हम आप को परिष्कृत सोमरस चढ़ाते तथा विराजने के लिए आप को कुश का आसन भेंट करते हैं. (३) स्वरन्ति त्वा सुते नरो वसो निरेक उक्थिनः. कदा सुतं तृषाण ओक आ गमदिन्द्र स्वब्दीव व २४ सगः.. (४) हे इंद्र! आप सर्वत्र वास करते हैं. आप सब को वास देते हैं. यजमान सोमरस चढ़ा कर आप की उपासना करते हैं. आप बैलों की तरह आवाज करते हुए अपने बेटों के यहां कब पधारने की कृपा करेंगे? (४) कण्वेभिर्धृष्णवा धृषद्वाजं दर्षि सहस्रिणम्. पिशङ्गरूपं मघवन्विचर्षणे मक्षू गोमन्तममीमहे.. (५) हे इंद्र! आप धनी, ज्ञानी, शत्रुनाशी व बहुरंगी हैं. आप हजारों तरह के वैभव व हजारों गुनी शक्ति दे सकते हैं. हम कण्ववंशी यजमान आप की उपासना करते हैं. (५) तरणिरित्सिषासति वाजं पुरंध्या युजा. आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रुवम्.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*