भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 249, कुल 310 में से

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पृष्ठ 249

चौदहवां अध्याय पहला खंड अभि प्र गोपतिं गिरेन्द्रमर्च यथा विदे. सूनु ॐ सत्यस्य सत्पतिम्.. (१) हे यजमानो! इंद्र सत्यपति, सत्य के स्वामी, गोपति व पर्वतपति हैं. वे यथाशक्ति आराधकों का संरक्षण करते हैं. आप इंद्र की अर्चना कीजिए. (१) आ हरयः ससृजिरे ऽ रुषीरधि बर्हिषि. यत्राभि संनवामहे.. (२) इंद्र के घोड़े उन को घास के उन आसनों पर प्रतिष्ठापित करें, जिन पर हम यज्ञ में उन्हें स्थापित कर के उन की उपासना करते हैं. (२) इन्द्राय गाव आशिरं दुदुहे वज्रिणे मधु. यत्सीमुपह्वरे विदत्.. (३) पास ही यज्ञ में जब इंद्र मधुर सोमरस का पान करते हैं, उस समय वज्रपाणि इंद्र के लिए गाएं मीठा दूध देती हैं. (३) आ नो विश्वास्वे हव्यमिन्द्र ॐ समत्सु भूषत. उप ब्रह्माणि सवनानि वृत्रहन् परमज्या ऋचीषम.. (४) हे इंद्र! हमारे यज्ञ आप की शोभा बढ़ाते हैं. आप के लिए गाई गई हमारी प्रार्थनाएं आप की शोभा बढ़ाती हैं. हम युद्धों में अपनी सहायता के लिए आप को याद करते हैं. आप वृत्रनाशक हैं. आप हमें मनपसंद धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (४) त्वं दाता प्रथमो राधसामस्यसि सत्य ईशानकृत्. तुविद्युम्नस्य युज्या वृणीमहे पुत्रस्य शवसो महः.. (५) हे इंद्र! आप पहले दाता हैं. आप धनदाता और सत्य के स्वामी हैं. हम आप की प्रकाशशीलता से जुड़ने एवं आप से बलवान और उत्तम संतान की कामना करते हैं. (५) प्रत्नं पीयूषं पूर्व्यं यदुक्थ्यं महो गाहाद्दिव आ निरधुक्षत. इन्द्रमभि जायमान ॐ समस्वरन्.. (६) अमृत तुल्य सोमरस अपूर्व और सर्वश्रेष्ठ है. यह स्वर्गलोक से प्रकट हुआ. इंद्र के सामने यजमान मंत्र गागा कर सोम की स्तुति करते हैं. (६) आदीं के चित्पश्यमानास आप्यं वसुरुचो दिव्या अभ्यनूषत. दिवो न वार ॐ सविता व्यूर्णते.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*