भारतकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 300, कुल 310 में से

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पृष्ठ 300

इरज्यन्नग्ने प्रथयस्व जन्तुभिरस्मे रायो अमर्त्य. स दर्शतस्य वपुषो वि राजसि पृणक्षि दर्शंतं क्रतुम्.. (७) हे अग्नि! आप अमर हैं. आप प्रज्वलित होइए. आप हमारे धन की बढ़ोतरी कीजिए. आप यज्ञ में तेजस्वी स्वरूप धारण करते हैं. आप हमारे यज्ञ पर पूर्ण दृष्टि रखते हुए सुशोभित होते हैं. (७) इष्कर्तारमध्वरस्य प्रचेतसं क्षयन्त ॐ राधसो मह:. रातिं वामस्य सुभगां महीमिषं दधासि सानसि रयिम्.. (८) हे अग्नि! आप यज्ञ के कर्ताधर्ता हैं. आप विशिष्ट चेतना से संपन्न हैं. आप अपार धन के स्वामी हैं. हम आप की उपासना करते हैं. आप हमें महिमा, सौभाग्य, अन्न व धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८) ऋतावानं महिषं विश्वदर्शत मग्नि ॐ सुम्नाय दधिरे पुरो जना:. श्रुत्कर्णं ॐ सप्रथस्तमं त्वा गिरा दैव्यं मानुषा युगा.. (९) हे अग्नि! आप सत्यवान व विश्वद्रष्टा हैं. आप हमारी स्तुति सुनने वाले हैं. सुख्यात व आप दिव्य हैं. हम वाणी से आप की प्रार्थना करते हैं. यजमान सुखवृद्धि के लिए आप को प्रतिष्ठित करते हैं. (९) छठा खंड प्र सो अग्ने तवोतिभिः सुवीराभिस्तरति वाजकर्मभिः. यस्य त्व ॐ सख्यमाविथ.. (१) हे अग्नि! जो आप को मैत्री भाव से पा लेता है, वह यजमान श्रेष्ठ वीर और श्रेष्ठ कर्मवान हो जाता है. आप की रक्षा (आशीर्वाद) से उस का बेड़ा पार हो जाता है. (१) तव द्रप्सो नीलवान्वाश ऋत्विय इन्धानः सिष्णवा ददे. त्वं महीनामुषसामसि प्रियः क्षपो वस्तुषु राजसि.. (२) हे अग्नि! आप को सोमरस से सींचा जाता है. वह प्रवहमान, इच्छित व प्रकाशमान है. उस को आप के लिए तैयार किया जाता है. आप महिमा वाली उषा देवियों के प्रिय हैं. आप रात को वस्तुओं में शोभित होते हैं. (२) तमोषधीर्दधिरे गर्भमृत्वियं तमापो अग्निं जनयन्त मातरः. तमित्समानं वनिनश्च वीरुधो ऽ न्त्तर्वतीश्च सुवते च विश्वहा.. (३) हे अग्नि! जलधाराएं मां की तरह आप को मानती हैं. आप को ओषधियां गर्भ में धारण करती हैं. वनस्पतियां आप को गर्भ में धारण करती हैं और संसार के सम्मुख प्रकट करती हैं. (३) ebook converter DEMO Watermarks*