साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
DevanagariHindipublished424 पृष्ठ
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अष्टमोऽध्यायः ४३
वसन्तकाल में सूर्य कपिलवर्ण, ग्रीष्म में स्वर्णतुल्य वर्ण, वर्षा में श्वेतवर्ण, शरत् काल में पाण्डुवर्ण धारण करते हैं। हेमन्त काल में सूर्य ताम्रवर्ण एवं शिशिर में लोहित-वर्ण हो जाते हैं। इस प्रकार सूर्य की प्रति ऋतु में वर्णकला का वर्णन किया गया। प्रति ऋतु में उन-उन वर्ण से रञ्जित होकर सूर्य शोभित होते हैं। यदि ऋतुओं का आविर्भाव न हो तब सूर्य अपने गृह में भिक्षुक के समान श्रीहीन प्रतीत होते हैं॥१२-१३॥
श्रीसाम्बपुराण में सूर्य-निगमन नामक अष्टम अध्याय समाप्त