साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 55, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवमोऽध्यायः ४५
करते हैं। पौष मास में पूषा, माघ में भग तथा फाल्गुन में त्वष्टा नामक सूर्य ताप देते हैं। यह द्वादशरूप विष्णुरश्मि द्वारा सदा दीप्त होते हैं॥५-८॥
दीप्यते गोसहस्रेण शतैश्च त्रिभिरर्यमा।
द्विसप्तकैर्विवस्वांस्तु ह्यंशुमान् पञ्चकैस्त्रिभिः ॥९॥
विवस्वानिव पर्जन्यो वरुणश्चार्यमा तथा।
इन्द्रस्तु द्विगुणैः षड्भिर्धतैकादशभिः शतैः ॥१०॥
मित्रस्तु दशभिः सार्द्धः पूषा तु दशभिः शतैः।
मित्रवच्च भगस्त्वष्टा सहस्रेण शतेन च ॥११॥
३०० किरणों द्वारा अर्यमा दीप्त होते हैं। १४०० किरणों से विवस्वान् तथा १५०० किरणों से अंशुमान दीप्त होते हैं। विवस्वान् के ही समान (१४०० किरणों से) पर्जन्य, वरुण तथा अर्यमा दीप्त होते हैं। किन्तु इन्द्र १२०० किरणों से, धाता ११०० किरणों से, मित्र १५०० किरणों से एवं एक हजार किरणों से ही पूषा दीप्त होते हैं। भग १५०० किरणों से तथा सहस्र-शत किरणों से त्वष्टा दीप्त होते हैं॥९-११॥
उत्तरोपक्रमेऽर्कस्य वर्धन्ते रश्मयस्तथा।
दक्षिणोपक्रमे तस्य ह्रसन्ते सूर्यरश्मयः ॥१२॥
एवं रश्मिसहस्रं तत् सूर्यलोकार्थसाधकम्।
भिद्यते ऋतु-मासाद्यैः सहस्रं बहुधा पुनः ॥१३॥
एवं नाम्ना चतुर्विंशतिरेषा च प्रकीर्त्तिता।
विस्तरेण सहस्रं तु पुनरन्यत् प्रकीर्त्तितम् ॥१४॥
उत्तरायणं में सूर्य की रश्मि वृद्धि को प्राप्त होती है एवं दक्षिणायन में उसका ह्रास होता है। इस प्रकार की सहस्र रश्मि से सूर्यलोक के प्रयोजन-साधक ऋतु-मासप्रभृति में भेद होता है और भी बहुरूप सहस्र भेद प्राप्त होते हैं। इस प्रकार चौबीस नाम सूर्य के कहे गये हैं। विस्तृत रूप से और भी १००० नाम कहे गये हैं॥१२-१४॥
अथ चैषां पुनर्नाम्नां धात्वर्थनिगमं शृणु।
दिव्यानां पार्थिवानां च वंशानामिह सर्वशः ॥१५॥
अदनान्नित्यमादित्यस्तपसां तेजसामयम्।
अदितेर्वा सुतो यस्मान्निगमज्ञैरुदाहृतः ॥१६॥
अपत्यप्रत्ययात्तस्मात् सूर्यस्यादित्यता स्मृता ॥१७॥
अब इन नामों की धातु तथा अर्थगत व्युत्पत्ति को सुनो। दिव्य तथा पार्थिव नामों को सर्वतोभावेन (अर्थयुक्त) सुनो। ये तपस्या तथा तेज का ग्रहण करने वाले (भक्षणकारी) हैं; अतः आदित्य हैं। अथवा देवमाता अदिति के पुत्र होने के कारण वेदविद् इन्हें आदित्य