सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबिगड़ जाये तो मृत्यु तक हो सकती है, बीमार होने के कारण निम्नलिखित हैं।
- 1. भोजन व पानी का सेवन प्राकृतिक नियमों के अनुसार न करना। इस गलती के कारण शरीर में 80 प्रकार के वात रोग, 40 प्रकार के पित्त रोग व 20 प्रकार के कफ रोग उत्पन्न होते हैं।
- 2. भोजन दिनचर्या व ऋतुचर्या के अनुसार ना करना
- 3. विरुद्ध आहार का सेवन
- 4. रिफाईंड तेल, रिफाईंड नमक, चीनी व मैदा आदि का सेवन
- 5. मिलावटी दूध, घी, मसाले, तेल इत्यादि का सेवन।
- 6. अनाज, दालें, फल, सब्जी इत्यादि में छिड़के गये रासायनिक खाद, कीटनाशक व जंतुनाशक इत्यादि का शरीर में पहुँचना।
- 7. प्राकृतिक/नैसर्गिक वेगों को (भूख, प्यास, मलमूत्र निष्कासन आदि) रोकना।
- 8. विकारों(क्रोध, द्वेष, अहंकार) आदि को पनपने देना।
➤ यदि हम 24 घंटे का निरीक्षण करें तो यह पायेंगे कि 24 घंटों में नैसर्गिक भूख दिन में केवल 2 बार लगती है। सूर्योदय से 2 घंटे तक और दूसरी सूर्यास्त के पहले। पेट(जठर) सबसे 7 बजे से 9 बजे तक अधिक कार्य क्षमता से काम करता है। उसी तरह सूर्यास्त से पहले हमारे पेट की जठर अग्नि तीव्र होती है। इसलिये भोजन सूर्यास्त के पहले समाप्त कर लेना चाहिए।
➤ हमारे पूर्वज बहुत वैज्ञानिक थे, वे अच्छी तरह से उपवास के वैज्ञानिक महत्व को समझ चुके थे इसलिए उन्होंने समय-समय पर व विशेष रूप से बारिश के मौसम में धर्म को आधार बनाकर अधिक से अधिक उपवास करने की परंपरा स्थापित की। क्योंकि बारिश के तीन-चार महीने सूर्योदय ठीक से नहीं होता और सूर्योदय तथा भूख का गहरा नाता है। उपवास करने से यदि पेट घंटे बिना भोजन के कण के रखा जाये तो पेट साफ-सफाई
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