संक्षिप्त योगवासिष्ठ
Sankshipt Yoga Vasistha
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३० | * अविच्छिन्नचिदात्मकः पुमानस्तीह नेतरत् * | [ संक्षिप्त योगवासिष्ठ
घूमना-फिरना होता है। ये राजकुमारोंके साथ आँगनकी उस भूमिमें विचरण करना जानते हैं,जिसपर फूल बिछे होते हैं।
‘ब्रह्मन् ! आजकल तो मेरे भाग्यके उलट-फेरसे ये उसी तरह अत्यन्त कृश और पाण्डु वर्णके हो गये हैं, जैसे पाला पड़नेसे कमल पीला पड़कर गलने लगता है। अपने चारों पुत्रोंमें मेरा सबसे अधिक प्रेम इन श्रीरामपर ही है। अतः मेरे धर्मात्मा ज्येष्ठ पुत्र श्रीरामको आप यहाँसे न ले जायँ। मुने ! यदि आपको निशाचर-सेनाका नाश ही अभीष्ट है तो मेरे साथ मेरी चतुरङ्गिणी सेनाको ले चलिये। सुना जाता है कि रावण नामसे प्रसिद्ध एक महापराक्रमी राक्षस है, जो साक्षात् कुबेरका भाई और विश्रवा मुनिका पुत्र है। यदि वही दुर्बुद्धि राक्षस आपके यज्ञमें विघ्न डालता है, तब तो हमलोग उस दुरात्माके साथ युद्ध करनेमें असमर्थ हैं।'
( सर्ग ७ ८ )
विश्वामित्रका रोष, वसिष्ठजीका राजा दशरथको समझाना, राजा दशरथका श्रीरामको बुलानेके लिये द्वारपालको भेजना तथा श्रीरामके सेवकोंका महाराजसे श्रीरामकी वैराग्यपूर्ण स्थितिका वर्णन करना
श्रीवाल्मीकिजी कहते हैं—भरद्वाज ! स्नेहवश नेत्रोंमें आँसू भरकर राजाके द्वारा कही गयी इस बातको सुनकर विश्वामित्र कुपित हो उठे और उन भूपालसे इस प्रकार बोले—"राजन् ! 'मैं आपकी माँग पूरी करूँगा' ऐसी प्रतिज्ञा करके आप उसे तोड़ रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आप सिंह होकर अब सियार बनना चाहते हैं। रघुवंशियोंके लिये यह व्यवहार अनुचित है। इससे तो इस कुलकी मर्यादा ही उलट जायगी। शीतरश्मि चन्द्रमासे कभी उष्ण किरणें नहीं प्रकट होतीं (आपसे ऐसे व्यवहारकी कदापि आशा नहीं की जाती थी)। राजन् ! यदि आप अपनी प्रतिज्ञाकी पूर्ति करनेमें असमर्थ हैं तो मैं जैसे आया था, उसी तरह लौट जाऊँगा। ककुत्स्थवंशी नरेश ! आप अपनी प्रतिज्ञासे भ्रष्ट होकर बन्धु-बान्धवोंके साथ सुखी होइये।”
महामुनि विश्वामित्रको क्रोधसे आक्रान्त जान उत्तम व्रतका पालन करनेवाले धैर्यवान् और बुद्धिमान् वसिष्ठजी बोले—"राजन् ! आप इक्ष्वाकुकुलमें साक्षात् दूसरे धर्मके समान उत्पन्न हुए हैं। आप श्रीमान् दशरथ तीनों लोकोंमें सज्जनोचित सद्गुणोंसे विभूषित हैं। धैर्यवान् तथा उत्तम व्रतके पालक हैं। आपको धर्मका त्याग नहीं करना चाहिये। आप धर्म और यशसे सम्पन्न होकर ही तीनों लोकोंमें विख्यात हुए हैं।