श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,058 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १७५-माल्यवान्का रावणको समझाना ... | ८१९ | १८९-रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश ...... | ८६८ |
| १७६-लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना ........................ | ८२४ | १९०-घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा .......... | ८७१ |
| १७७-हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार ............. | ८२५ | १९१-त्रिजटा-सीता-संवाद .................. | ८७३ |
| १७८-भरतजीके बाणसे हनुमान्का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद ........ | ८२८ | १९२-राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि ............................. | ८७६ |
| १७९-श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना ............................ | ८२९ | १९३-मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया ......................... | ८८१ |
| १८०-रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद ... | ८३२ | १९४-विभीषणका राज्याभिषेक ........... | ८८४ |
| १८१-कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति | ८३४ | १९५-हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा ......................... | ८८५ |
| १८२-मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना .......... | ८४२ | १९६-देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा .............................. | ८८८ |
| १८३-मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार .................... | ८४५ | १९७-विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध . | ८९६ |
| १८४-रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध ................ | ८४९ | १९८-विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना | ८९७ |
| १८५-लक्ष्मण-रावण-युद्ध .................. | ८५४ | १९९-पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान .. | ८९९ |
| १८६-रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध ....................... | ८५५ | २००-श्रीरामचरितकी महिमा ............... | ९०३ |
| १८७-इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध ....................... | ८६१ | उत्तरकाण्ड | |
| १८८-रावणका विभीषणपर शक्ति छोड़ना, रामजीका शक्तिको अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण-युद्ध ............................ | ८६७ | २०१-मंगलाचरण ............................ | ९०५ |
| २०२-भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द ......... | ९०६ | ||
| २०३-श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द .................... | ९१२ | ||
| २०४-राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति ............................. | ९१९ | ||
| २०५-वानरोंकी और निषादकी विदाई .. | ९२६ | ||
| २०६-रामराज्यका वर्णन .................... | ९३० |