भारतकोश
श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस

Shri Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,058 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 1058 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 8

[६]

विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
४०- राजा दशरथका पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियोंका
गर्भवती होना.....१९०५९- बारातका जनकपुरमें आना
और स्वागतादि .....२८८
४१- श्रीभगवान्का प्राकट्य और
बाललीलाका आनन्द .....१९२६०- श्रीसीता-राम-विवाह .....३०६
४२- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-
लक्ष्मणको माँगना .....२०५६१- बारातका अयोध्या लौटना और
अयोध्यामें आनन्द.....३२६
४३- विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा .....२०८६२- श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा...३४१
४४- अहल्या-उद्धार.....२०९अयोध्याकाण्ड
४५- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका
जनकपुरमें प्रवेश.....२११६३- मंगलाचरण .....३४३
४६- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी
प्रेम-मुग्धता .....२१३६४- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी
व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे
उनकी प्रार्थना .....३४८
४७- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण... २१६२१६६५- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना,
कैकेयी-मन्थरा-संवाद .....३५३
४८- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका
प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका
परस्पर दर्शन .....२२३६६- कैकेयीका कोपभवनमें जाना .....३६२
४९- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं
वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद २२९२२९६७- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-
शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और
वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें
भेजना .....३६४
५०- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका
यज्ञशालामें प्रवेश .....२३५६८- श्रीराम-कैकेयी-संवाद .....३७७
५१- श्रीसीताजीका यज्ञशालामें
प्रवेश .....२४२६९- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-
वासियोंका विषाद, कैकेयीको
समझाना .....३८१
५२- बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी
घोषणा .....२४३७०- श्रीराम-कौसल्या-संवाद .....३८७
५३- राजाओंसे धनुष न उठना,
जनककी निराशाजनक वाणी .....२४४७१- श्रीसीता-राम-संवाद.....३९४
५४- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध .....२४५७२- श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद .....४००
५५- धनुषभंग .....२५२७३- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद .....४०२
५६- जयमाल पहनाना .....२५५७४- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद .....४०४
५७- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद २६०२६०७५- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका
महाराज दशरथके पास विदा माँगने
जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना .४०६
५८- दशरथजीके पास जनकजीका
दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका
प्रस्थान .....२७३७६- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन
और नगर-निवासियोंको सोये
छोड़कर आगे बढ़ना .....४०९