भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 1352, कुल 2621 में से

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पृष्ठ 1352

‘श्रेष्ठ वानरो! तुमलोगोंमें कभी किसीकी भी गति कहीं नहीं रुकती। इसलिये समुद्रको लाँघनेमें जिसकी जितनी शक्ति हो, वह उसे बतावे’॥ २२ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें चौंसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६४ ॥

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