शृंगार शतक
Shringar Shatak
by भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य
Source: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (origin)
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यद्यपि इस वर्ष मैंने अपने सिरसे प्रेसका भँकट हटा दिया है ; तथापि मेरे सिर पर कामोंका बड़ा बोझ रहता है, इससे जो काम दूसरा कोई अच्छे-से-अच्छा लेखक एक सालमें करेगा, बही मुझे, मजबूर होकर, २३ महिनोंमें ही, करना पड़ता है । फिर ; ऐसी भटापटीके काममें गलतियों और त्रुटियोंका रह जाना नितान्त सम्भव है । इसलिए, मैं विद्वानोंसे अत्यन्त विनीत भावसे क्षमा प्रार्थना करता हूँ । आशा है, कि उदारहृदय सज्जन मुझे क्षमा प्रदान करनेमें आना-कानो न करेंगे ।
इस शतकके अनुवादमें भी, मैंने श्रीमान् पण्डितवर ज्वाला-दत्त जी शर्मा, मुगदाबाद, के “महाकवि दाग” “ज्ञौक” और “गालिब” तथा बाबू रघुराजसिंहजी वी० ए०के “महाकवि-नजीर” से बहुत कुछ सहायता ली है ; अतः मैं उक्त दोनों उदार-हृदय सज्जनोंको हार्दिक धन्यवाद देता हूँ । स्माल काज कोर्ट, कलकत्ता, के वकील बाबू छोगमलजी चोपड़ा महोदयने मुझे, इस पुस्तकके अनुवादमें भी, मौक़े-मौक़े पर, बहुत कुछ सहायता दी है ; अतः मैं बाबू साहब मङ्गलका अतीव आभारी हूँ । वकील साहब बड़े ही विनम्र और सुशील सज्जन हैं । आपसे जिस समय जिस काममें सहायता माँगी जाती है, आप अपना हर्ज करके भी, फौरन साहाय्य प्रदान करते हैं ।
विनीत—
हरिदास ।