भारतकोश
श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ

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( १० ) २४. योगसिद्धि या तत्त्वज्ञानका प्रभाव ... ... १४६ २५. योगसिद्ध या तत्त्वज्ञकी स्थिति ... ... १४७ २६. परमात्मस्वरूपका वर्णन ... ... १४९ तृतीय अध्याय २७. एक ही परमात्मामें शासक और शासनीय भावका समर्थन ... १५१ २८. परमेश्वरसे जगत्की सृष्टिका प्रतिपादन ... ... १५४ २९. परमेश्वरका स्तवन ... ... १५६ ३०. परमात्मतत्त्वके ज्ञानसे अमृतत्वकी प्राप्ति ... ... १५८ ३१. परमेश्वरके विषयमें ज्ञानीजनोंके अनुभवका प्रदर्शन ... ... १६० ३२. परमेश्वरके सर्वात्मभाव या विराट्-स्वरूपका वर्णन ... ... १६५ ३३. आत्माके देहावस्थान और इन्द्रिय-सम्बन्धराहित्यका निरूपण ... १६७ ३४. ब्रह्मका निर्विशेष रूप ... ... १७० ३५. आत्मज्ञानसे शोकनिवृत्तिका निरूपण ... ... १७१ ३६. आत्मस्वरूपके विषयमें ब्रह्मवेत्ताका अनुभव ... ... १७२ चतुर्थ अध्याय ३७. परमेश्वरसे सद्बुद्धिके लिये प्रार्थना ... ... १७४ ३८. परमात्माकी सर्वरूपता ... ... १७५ ३९. प्रकृति और जीवके सम्बन्धका विचार ... ... १७७ ४०. जीव और ईश्वरकी विलक्षणता ... ... १७८ ४१. ब्रह्मकी अधिष्ठानरूपता और उसके ज्ञानसे कृतार्थता ... १८२ ४२. मायोपाधिक ईश्वर ही सबका स्रष्टा है ... ... १८३ ४३. प्रकृति और परमेश्वरका स्वरूप तथा उनकी सर्वव्यापकता ... १८४ ४४. कारण-ब्रह्मके साक्षात्कारसे परम शान्तिकी प्राप्ति ... ... १८६ ४५. अखण्डज्ञानकी सिद्धिके लिये परमात्माकी प्रार्थना ... १८८ ४६. परमात्मज्ञानसे शान्ति-प्राप्ति एवं बन्धननाशका पुनः उपदेश ... १९० ४७. परमात्मसाक्षात्कारके साधन ... ... १९४ ४८. ज्ञानसे द्वैत-निवृत्तिका उपदेश ... ... १९६ ४९. ब्रह्मके अनुपम एवं इन्द्रियातीत स्वरूपका वर्णन ... १९८ ५०. परमेश्वरका स्तवन ... ... २०० पञ्चम अध्याय ५१. अक्षराश्रित विद्या-अविद्या और उनके शासक परमेश्वरके स्वरूप तथा माहात्म्यका वर्णन ... ... २०३

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