स्पन्दकारिका (भट्ट कल्लट स्पन्दवृत्ति व हिन्दी व्याख्या सहित)
Spanda Karika with Spanda Vritti & Hindi Commentary
महर्षि वसुगुप्त / भट्ट कल्लट द्वारा
स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास · मोतीलाल बनारसीदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट II १६९ कार्यत्व २२, २५, २८, ६९, ८१, ८४ कार्यरूप-जगत् २८ काल २४, २८, ६३, ६५, ६७, ८१, ९७ किञ्चित्-कर्तृत्व ६५, ९७ किञ्चित्-चलन १७, १८, ६५, ६६ किञ्चित्-ज्ञत्व ६५, ९८ क्रिया ५३, ५६, ५८, ५९, ६४ क्रिया-शक्ति २०, २३, २९, ४३, ५५, ९४ कुमारिल ३७ कूर्मांग-संकोच १०६ ख खेचरी २३, ४७, ४८ ग गति-निरोध १०५ गतिमयता २२ गुण २८, ४१ गुणस्पन्द ९३ गुणी २८, ४१ गोचरी २३, ४७, ४८ गन्ध २४, ३२, ४८, ६५, ६९ ग्राहक ४२, ५२, ५७ ग्राहकता ४२, ५३, ७८ ग्राहक-भूमिका ३९ ग्राह्य ४२, ४९, ५१-५२ ग्राह्यता ४२, ७८ ग्राह्य-भूमिका ३९ ग्राह्य-वर्ग ५३, ६२ ग्लानि १३५ घ घनता २९ घोरा १४९ घोरतरा १४९ च चक्रेश्वर १२६, १६०, १६१, १६२ चन्द्रमा १०८ चार्वाक ३४, ३८, ४० चित्-चमत्कार १३६, १३७ चित्-शक्ति २०, ५५, ९६ चिति ५७ चिति-क्रिया ५७ चिति-शक्ति १६, ४८, ४९ चित्त ४४, ७०, १०१, १०२, १०३, १०४, १०९, ११२, ११४, १२८ चिद्-गगनचरी ४८ चिद्-घन १७, ३१ चिद्-दर्पण २९ चिद्-रूप २८, ५३, ६७, ६९, ८१, ८५, ९१, ११३ चिदात्मा २८ चिदाकाश १०९, १११ चिन्मात्ररूप ९१ चेतन १५, २९, ३१, ३४, ४०, ४५, ४७, ५७, ९० चेतना-शक्ति १६, ४७ चैतन्य १६, १७, २९, ३८, ४०, ५०, ५५, ५६, ५७, ५९, ६५-६६, ७९, ९० चैतन्यात्मक-स्वभाव ३४ चैतन्य-विशिष्ट ४१ चैतन्य-सत्ता २९, ३५ चैतन्य-सत्तारूप २८ ज जड़ १८, ७६, ८०, ८४ जड़-प्रमेयवर्ग ५१ जड़-वर्ग ४५ जड़-स्वभाव ३२, ३३, ८५, ८९