भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 696 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 29

१७ २. कर्म फलोल्लेख होने से भोक्ता की ब्रह्मता में संशय गुहा प्रविष्ट आत्माओं की जीवता और ब्रह्मता का समर्थन कठोपनिषद् के वाक्यों की पर्यालोचना द्वारा ब्रह्म पक्ष का समर्थन । —पृ०४०५-१४ ३. अन्तराधिकरण (सूत्र १३-१८) १. पूर्वपक्ष—नेत्र पुरुष की जीवता का अनुमोदन । २. (सिद्धान्त) अक्षि पुरुष की परमात्मकता का निरूपण । जगत की स्थिति परिचालन आदि के आधार पर अक्षि पुरुष की परमात्मकता का उपपादन । "कं खं ब्रह्म" इत्यादि श्रुति कथित सुखविशिष्टाभिधान के अनुसार परमात्मा का निर्धारण । उपकोशल उपाख्यान वर्णित अग्नि संवाद द्वारा परमात्मा का उपपादन । नियति, स्थिति और तद्संभवता हेतु से छायात्मा और जीवात्मा की अक्षि पुरुषता का प्रतिषेध । —पृ०४१४-२४ ४. अन्तर्याम्यधिकरण (सूत्र १६-२१) १. पूर्वपक्ष—अन्तर्यामी शब्द का पृथिवी आदि की अधिष्ठात्री [