श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३ तथा पूर्ववर्त्ती वाक्य की अनुवृत्ति के आधार पर परब्रह्म की कारणता का अवधारण । —पृ०५८२-८७ ५ जगद्वाचित्वाधिकरण सूत्र (१६-१८) १. पूर्वपक्ष-“यः एतेषां” श्रुत्युक्त पुरुष शब्द से साङ्गोक्त पुरुष का समर्थन । २. (सिद्धान्त)-कर्त्ता पद से परमात्मता का निरूपण तथा जीवात्म दर्शन पक्ष का खण्डन । जीव और मुख्य प्राण परता का प्रत्याख्यान जैमिनि मत के अनुसार परमात्मसत्ता के ज्ञापन के लिए जीव के उल्लेख का निरूपण । —पृ०५८७-६६ ६ वाक्यान्वयाधिकरण [सूत्र १६-२२] १. पूर्वपक्ष-“आत्मा वा अरे” श्रुति कथित आत्मा की जीवता की परिकल्पना । २. (सिद्धान्त)- समस्त वेदांत वाक्यों की तात्पर्य पर्यालो- चना से आत्मा शब्द की ब्रह्मार्थकता का प्रतिपादन । ३. आश्मरथ्य 'औडुलोमि, काशकृत्स्न आदि आचार्यों के मत से भी परमात्मकता का प्रतिपादन । पृ०५६६-६१६ ७ प्रकृत्यधिकरण [सूत्र २३-२८] १. पूर्वपक्ष-उपादान और निमित्त कारणकी लोकसिद्ध पृथकता से परब्रह्म की निमित्तकारणता मात्र की परिकल्पना । २. (सिद्धान्त -सृष्टि विषयक चिन्ता प्रणाली के आधार पर तथा साक्षात् संबंध से ब्रह्म की निमित्त और उपादान कारणता का विवेचन । स्थूल, सूक्ष्म अवस्था भेद से निरंजनता आदि बोधक वाक्यों का उपपादन तथा ब्रह्म के जगदुपादानता बोधक वाक्य का वर्णन । —पृ०६१६-३५ ८ सर्वव्याख्यानाधिकरण [सूत्र २६] जगत् कारणता बोधक समस्त वेदांत वाक्यों की ब्रह्म कारणपरता का निरूपण । —पृ०६३५-३६ ankurnagpal108@gmail.com