श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंपूर्ण लिंगक द्रव्यों का बोधक है, यह भी मानना पड़ेगा । “अरुणिमा” के साथ “एक वर्षीया” का संबंध हो ही ऐसा कोई नियम नहीं है । अत्राभिधीयते “अर्थैकत्वे द्रव्यगुणयोरेककर्म्यान्नियमः स्यात्” –“अरुणयैकहायन्या” इत्यारुणयविशिष्टद्रव्यैकहायनीद्रव्यवाचिप- दयोः सामानाधिकरण्येनाऽर्थैकत्वे सिद्धे सत्येकहायनीद्रव्यारुण्य- गुणयोररुणयेति पदेनैव विशेषणविशेष्यभावेन संबंधिताऽभिहितयोः क्रयाख्यैक कर्मान्वयाविरोधादरुणिम्नः क्रयसाधनभूतैकहायन्यन्वय नियमः स्यात् । इस पर यजुर्वेद ६।१।६ में निर्णय किया गया है कि—“अर्थ ( प्रयोजन ) यदि एक हो तो गुण और द्रव्य ( विशेषण-विशेष्य ) दोनों का एक कर्म से प्रयोजन सिद्ध होगा” “अरुण्यैकहायन्या” इस उदाहरण में अरुण्यत्व विशिष्ट द्रव्यवाची अरुण शब्द और एकहायनी द्रव्यवाची एकहायनी शब्द की सामानाधिकरण्य के नियम से एकार्थ प्रतिपादनता जब