सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
पृष्ठ 5, कुल 516 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 5
४
सुभाषितरत्नभाण्डागारस्य
| विषया | पृष्ठे | श्लोक | विषया | पृष्ठे | श्लोक | विषया | पृष्ठे | श्लोक |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रत्नानि | २१७ | ४७-६३ | (शेष) | २३५ | १६५-१६५ | पलाण्डु | २४३ | १९३ |
| (वज्रमणि) | २१८ | ६४ | जलचरान्योक्तय | २३५ | १-५ | तृणानि | २४४ | १९४-१९४ |
| (कौस्तुभमणि) | २१८ | ६५ | मत्स्य | २३५ | १ | कल्मा | २४३ | १९६-१९७ |
| (सोमकान्त-सूर्यकान्तौ) | २१८ | ६६ | (रोहित) | २३५ | २ | ताम्बूलम् | २४३ | १९८-१९९ |
| (चन्द्रकान्त) | २१८ | ६७ | (राघव) | २३५ | ३ | तुम्बी | २४३ | २००-२०१ |
| (स्फटिक) | २१८ | ६८ | कूर्म | २३५ | ४-५ | वंश | २४३ | २०२ |
| (मरकत) | २१८ | ६९-७१ | वृक्षान्योक्तयः | २३६ | १-२४३ | कुन्द | २४३ | २०३-२०४ |
| (माणिक्यम्) | २१८ | ७२ | कल्पद्रुम | २३७ | ३१-३७ | कमलानि | २४३ | २०५-२४२ |
| काच | २१८ | ३३ | पारिजात | २३७ | ३८-३९ | लता | २४५ | २४३ |
| शङ्ख | २१८ | ७४-८० | चन्दन | २३७ | ४०-६१ | संकीर्णान्योक्तयः | २४५ | १-१०४ |
| (पाञ्चजन्य) | २१८ | ८१-८२ | अगह | २३८ | ६२-६३ | शिवः | २४५ | १-६ |
| नद्यन्योक्तय | २१८ | १-११ | चम्पक | २३८ | ६४-७१ | परशुराम. | २४५ | ७ |
| गङ्गा | २१९ | ९-१० | बकुल | २३८ | ७२-७३ | रामचन्द्र | २४५ | ८ |
| शोण. | २१९ | ११ | अशोक | २३८ | ७४-७७ | सीता | २४५ | ९ |
| तडागान्योक्तय | २१९ | १-१९ | यूथी | २३८ | ७८ | इन्द्र | २४५ | १० |
| मानसम् | २२० | २० | मालती | २३८ | ७९-८८ | स्मर | २४५ | ११ |
| कूपान्योक्तय | २२० | १-९ | मल्लिका | २३९ | ८९ | आकाशम् | २४५ | १२ |
| मरुस्थलान्योक्तय | २२० | १-६ | दमनक | २३९ | ९० | पृथ्वी | २४५ | १३ |
| दावानलान्योक्तय | २२० | १-९ | केतकी | २३९ | ९१-९६ | जलम् | २४५ | १-१५ |
| वाडवानल | २२० | ९ | पाटला | २३९ | ९७ | मारुत | २४५ | १६ |
| व्योमचरान्योक्तय | २२१ | १-२३९ | सहकार | २३९ | ९८-१३२ | मृगतृष्णिका | २४५ | १७ |
| गरुड | २२१ | १-२ | पनस | २४० | १३३ | सुवर्णम् | २४८ | १८-१९ |
| हंस | २२१ | ३-४० | तमाल | २४१ | १३४ | मौक्तिकम् | २४५ | २०-२२ |
| मधुकर | २२२ | ४१-११४ | कदली | २४१ | १३५ | सुवर्णकार | २४६ | २३ |
| कोकिल | २२५ | ११५-१४७ | द्राक्षा | २४१ | १३६-१३७ | हार | २४६ | २४-२९ |
| चातक | २२६ | १४८-१६८ | दाडिम | २४१ | १३८-१३९ | कञ्चुक | २४६ | ३० |
| मयूर | २२६ | १६९-१७८ | नालिकेर | २४१ | १४० | कुण्डलम् | २४६ | ३१ |
| चक्रवाक | २२६ | १७९-१८० | ताल | २४१ | १४१-१४२ | नासाभूषणम् | २४६ | ३२ |
| शुक | २२७ | १८१-२०३ | भूर्ज | २४१ | १४३-१४४ | वलय | २४६ | ३३ |
| काक | २२८ | २०४-२२५ | अश्वत्थ | २४१ | १४५ | रत्न | २४६ | ३४ |
| बक | २२९ | २२६-२३२ | न्यग्रोध | २४१ | १४६-१४८ | वीणादण्ड | २४६ | ३५ |
| घूक | २२९ | २३३ | मधूक | २४१ | १४९-१५० | मुरली | २४६ | ३६-३७ |
| खद्योत | २२९ | २३४-२३९ | शाल्मलि | २४१ | १५१-१५४ | कुविन्द | २४६ | ३८ |
| स्थलचरान्योक्तय | २२९ | १-१६५ | निम्ब | २४१ | १५५-१५९ | लाङ्गलिक | २४६ | ३९ |
| सिंह. | २२९ | १-५४ | बब्बुल | २४२ | १६०-१६३ | कर्णधार | २४६ | ४०-४१ |
| गज | २३१ | ५५-९८ | खदिर. | २४२ | १६४-१६६ | तैलक | २४६ | ४२ |
| मृग | २३३ | ९९-१२३ | किंशुक | २४२ | १६७-१६९ | पञ्जरलावक. | २४६ | ४३ |
| करभ | २३४ | १२४-१३७ | शाखोट | २४२ | १७०-१७१ | व्याध | २४६ | ४४-४५ |
| रासभ | २३४ | १३८ | पीलुः | २४२ | १७२ | विषममन्त्री | २४७ | ४६ |
| वृषभ | २३४ | १३९-१४९ | करीर | २४२ | १७३-१७४ | मालाकार | २४७ | ४७ |
| कपि | २३५ | १५०-१५२ | बिल्व | २४२ | १७५ | कायस्थ | २४७ | ४८ |
| वराह | २३५ | १५३-१५४ | शालि | २४२ | १७६ | कवि. | २४७ | ४९ |
| (आदिवराह) | २३५ | १५५ | कुटज | २४२ | १७७ | बाला | २४७ | ५० |
| श्वा | २३५ | १५६ | इक्षु | २४२ | १७८-१८० | शैलूष | २४७ | ५१ |
| वृश्चिक | २३५ | १५७ | लवङ्गी | २४८ | १८१-१८३ | कुशीलवा | २४७ | ५२ |
| भेक | २३५ | १५८-१५९ | कार्पास | २४२ | १८४-१८६ | बाला | २४७ | ५३ |
| जम्बुक | २३५ | १६० | शण | २४३ | १८७ | पल्लीपतिपुत्री | २४७ | ५४ |
| सर्पः | २३५ | १६१-१६२ | कण्टकारिका | २४३ | १८८ | पान्थ | २४७ | ५५-५६ |
| धत्तुर. | २४३ | १८९-१९२ | कस्तूरिका | २४७ | ५७-६१ |