सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता
Sushruta Samhita
महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा
स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished872 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|
| ल प्रकार के दोष जो अन्तरिक्ष जल में नहीं | १६४ | हथिनी का दूध | १६८ | मधु के आठ भेद उनके गुणदोष | |
| दूषित पानी को स्वच्छ करने के उपाय | १६४ | प्रातःकाल का दूध | १६८ | भिन्न प्रकार | १७५ |
| दूषित पानी को पीने से कौन रोग होते हैं | १६४ | सायंकाल का दूध | १६८ | इलुवर्ग के गुण दोष | १७७ |
| रात वस्तुयें जो मलिन जल को स्वच्छ करती हैं | १६५ | कच्चा दूध | १६८ | मध्य वर्ग के भिन्न प्रकार के गुण दोष | १७८-१८२ |
| पाँच वस्तुयें जिन पर पानी का बर्तन रखना चाहिये | १६५ | स्त्री के दूध को छोड़ सब गरम पीने चाहिये | १६९ | मूत्र के भिन्न प्रकार, गुण दोष | १८२ |
| पानी को ठण्डा करने के सात उपाय | १६५ | धारोण दूध | १६९ | षट्चत्वारिंशत्तमोऽध्यायः | |
| भूमि के पानी के गुण | १६५ | त्यागने योग्य दूध | १६९ | अन्नपानविधि की व्याख्या | १८३ |
| पृथक् पृथक् नदियों के जल के गुण-दोष | १६५ | दही तीन प्रकार का है | १६९ | शालिवर्ग के भिन्न प्रकार, गुण दोष | १८४ |
| जिन अवस्थाओं में शीतल पानी का देना उत्तम है | १६६ | मधुर दही | १६९ | कुधान्यवर्ग के भिन्न प्रकार | |
| जिन अवस्थाओं में शीतल जल नहीं देना चाहिये | १६६ | मन्दजात दही | १६९ | गुण दोष | १८५ |
| नदी, सरोवर, तङ्गा, वापी, कुण्ड का खारा पानी, चौण्ड्य, झरने, औद्भिद, वैकिर, खेतों का पानी, छोटे गड्ढों का पानी | १६६ | गाय, बकरी, भैंस, ऊँटनी, भेड़, घोड़ी, स्त्री, हथिनी के दूध के | मांसवर्ग के भिन्न प्रकार, गुण दोष | १८८ | |
| आनूप देश का पानी | १६६ | दही के गुण दोष | १६९ | फलवर्ग के भिन्न प्रकार, गुण दोष | १९४ |
| गरम पानी | १६६ | गाय के दूध का दही सर्वश्रेष्ठ वस्त्र में से छाना दही | १६९ | शाकवर्ग के भिन्न प्रकार, गुण दोष | १९९ |
| रात का वासी पानी | १६६ | उबाल कर दूध से बनाई दही | १७० | पुष्पवर्ग के भिन्न प्रकार | |
| नारियल का पानी | १६६ | मलाई | १७० | गुण दोष | २०४ |
| किन अवस्थाओं में गरम करके ठण्डा किया हुआ जल देना चाहिये | १६७ | मलाई के बिना दही | १७० | कन्दवर्ग के भिन्न प्रकार, गुण दोष | २०५ |
| किस अवस्था में पानी धीरे धीरे पीना चाहिये | १६७ | दही किस ऋतु में नहीं खाना चाहिए | १७० | लवणवर्ग के भिन्न प्रकार | |
| दूध आठ प्रकार का है | १६७ | मस्तु के गुण | १७० | गुण दोष | २०६ |
| गाय का दूध | १६७ | तक्रवर्ग | १७० | मशियों के गुण | २०७ |
| बकरी का दूध | १६८ | तक्र किस अवस्था में नहीं खाना चाहिए | १७० | सब वर्गों में श्रेष्ठ | २०७ |
| ऊँटनी का दूध | १६८ | तक्र के गुण दोष | १७० | कृत्ताक्षवर्ग के भिन्न प्रकार | |
| भेड़ का दूध | १६८ | तुरन्त निकाला मक्खन | १७० | गुण दोष | २०८ |
| भैंस का दूध | १६८ | दूध से निकाला मक्खन | १७१ | भक्ष्यवर्ग के भिन्न प्रकार, गुण दोष | २१३ |
| घोड़ी का दूध | १६८ | दूध की मलाई | १७१ | अनुपानवर्ग | २१६ |
| स्त्रियों का दूध | १६८ | घी का सामान्य गुण | १७१ | सम्पूर्ण आहारविधि | २२० |
| गाय, बकरी, भैंस, ऊँटनी, भेड़, घोड़ी, स्त्री, हथिनी का घी | १७२ | निदानस्थान | |||
| दूध से निकाला घी | १७२ | प्रथमोऽध्यायः | |||
| पुरातन घी | १७२ | वातव्याधिनिदान की व्याख्या | २२३ | ||
| दस साल का पुराना घी | १७२ | वायु के विषय में प्रश्न | २२३ | ||
| एक सौ ग्यारह साल का घी | १७२ | वायु के स्वरूप का वर्णन | २२३ | ||
| तेल | १७२ | वायु का शरीर में विरेचन का क्रम | २२४ | ||
| भिन्न २ प्रकार के तेल के गुण दोष | १७३ |