भारतकोश
सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता

Sushruta Samhita

महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished872 पृष्ठ

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विषयानुक्रमणिकां

११

विषयपृष्ठ
गर्भस्त्राव और गर्भपात२५४
असाध्य मूढ़गर्भ तथा गर्भिणी के लक्षण२५४
शिशु के गर्भाशय में मरने के लक्षण२५४
माता के मरने पर जीवित गर्भ को निकालने के उपाय२५४
नवमोऽध्यायः ✓
विद्रधि निदान व्याख्या२५५
सम्प्राप्ति२५५
वातजन्यविद्रधि२५५
पित्तजन्यविद्रधि२५५
कफजन्यविद्रधि२५५
सन्निपातजन्यविद्रधि२५५
आगंतुजविद्रधि२५६
रक्तजन्यविद्रधि२५६
अभ्यन्तरविद्रधि२५६
स्थान२५७
स्थानमेद से विशेष लक्षण२५७
रक्तविद्रधि२५७
गुल्म और विद्रधि रोगमें मेद२५७
विद्रधि के अस्थि में पहुँच कर पक जाने के लक्षण२५७
दशमोऽध्यायः
विसर्प नाड़ी स्तन रोग की व्याख्या२५८
विसर्प के लक्षण२५८
वातादि दोष मेदों से लक्षण२५८
पित्तजन्य विसर्प२५८
कफजन्य विसर्प२५८
सन्निपातजन्य विसर्प२५८
क्षतजन्य विसर्प२५८
साध्यासाध्य२५८
नाडी२५९
आठ प्रकार के नाडी ब्रण२५९
स्तन्यनिदान२५९
जिनमें स्तन रोग नहीं होते२५९
स्तन्य२५९
प्रवृत्ति के कारण२६०
विषयपृष्ठ
स्तन्य वायु से दूषित होने पर सम्प्राप्ति२६०
वातादिजन्य पांचों स्तन रोगों के लक्षण२६१
एकादशोऽध्यायः ✓
ग्रन्थि, अबुर्द, गलगण्ड अपची निदान की व्याख्या२६१
ग्रन्थि के लक्षण ✓२६१
वात, पित्तजन्य ग्रन्थि२६१
मेदोग्रन्थि२६१
शिराजन्य ग्रन्थि२६१
अपचीरोग की सम्प्राप्ति२६२
अबुर्द ✓२६२
अबुर्द के लक्षण२६२
मांसजन्य अबुर्द२६२
द्विरबुर्द अधबुर्द असाध्य२६२
न पकने के कारण२६३
गलगण्ड सम्प्राप्ति२६३
वात, कफ, मेदजन्य गलगण्ड२६३
असाध्यता२६४
गलगण्ड का स्वरूप२६४
द्रादशोऽध्यायः
वृद्धि, उपदंश तथा श्लीपद निदान२६४
वृद्धिरोग के सात प्रकार ✓२६४
पूर्वरूप ✓२६५
लक्षण ✓२६५
उपदंश के लक्षण२६६
उपदंश के पाँच प्रकार२६६
श्लीपद के लक्षण२६६
त्रयोदशोऽध्यायः
क्षुद्ररोगों के निदान की व्याख्या संक्षेप में ४४ क्षुद्र रोगों के नाम तथा पृथक् पृथक् लक्षण२६७
चतुर्दशोऽध्यायः
शूकदोष निदानव्याख्या२७१
१८ प्रकार के शूक दोषजन्य रोग तथा उनके पृथक् पृथक् लक्षण२७२ २७३
विषयपृष्ठ
पञ्चदशोऽध्यायः ✓
भग्गनिदान व्याख्या२७४
भग्ग रोग के कारण२७४
सन्धिपुक्त भग्ग के ६ प्रकार२७४
लक्षण२७४
विशेष लक्षण२७४
सामान्य लक्षण२७४
पांच प्रकार की अस्थियां२७५
षोडशोऽध्यायः
मुख रोग निदानव्याख्या२७५
६५ प्रकार के मुखरोग सात स्थानों में उत्पन्न होते हैं२७५
ओष्ठ रोग२७५
वायु, पित्त, कफ, सन्निपात, रक्त, मांस, मेद, अभिघात के कारण ओष्ठरोग२७५
दन्तमूल में स्थित १५ रोग तथा उनके लक्षण२७५
जिह्वागत रोग२७६
वायु, पित्त, कफ, अलास, उपजिह्वाका के कारण जिह्वागत रोग२७६
तालुजन्य नौ रोग और उनके लक्षण२७६
कण्ठगत सत्रह रोग और उनके लक्षण२७६
सर्वसररोग के ४ प्रकार तथा उनके लक्षण२८०
शारीरस्थान
प्रथमोऽध्यायः
सर्वभूतचित्तानामक शरीर की व्याख्या२८१
अव्यक्त निरूपण२८२
२४ तत्त्वों की व्याख्या२८३
ज्ञान तथा कर्मेन्द्रियों के विषय२८५
आठ प्रकृतियाँ तथा १६ विकार२८५
चौबीस तत्त्वों का वर्ग अचेतन२८६
प्रकृति तथा पुरुष के साधर्म्य तथा वैधर्म्य की व्याख्या२८६