भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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बाद राजीव भाई बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव भाई पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे। उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिड़का गया दयासागर ने उनको अस्पताल चलने को कहा। राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होंने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे। थोड़ी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाईयाँ दीं। फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई से सेक्टर 9 में इस्प्यात स्वयं अस्पताल में भर्ती किया गया। इस अस्पताल में अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको। अच्छे हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। राजीव भाई एलोपैथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे। उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहते थे। उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपैथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू?। ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु में भर्ती होने को कहा।

फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण में आईसीयु भर्ती करवाएंगे। उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। (बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की ये सारी घटना राज्य प्रभारी दयासागर और अन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई है अब ये कितनी सच है या झूठ ये तो उनके नार्को टेस्ट करने ही पता चलेगा।) क्योंकि राजीव जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया। 30 नवंबर को उनके मृत शरीर को पतंजलि लाया गया जहां हजारों की संख्या में लोग उनके। और 1 दिसंबर राजीव जी का दाह किया गया।

अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे संस्कार कनखल हरिद्वार में

राजीव भाई के चाहने वालों का मे राजीव जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड़ गया था। उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। राजीव भाई की मौत लगभग भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत से मिलती जुलती है आप सबको याद होगा ताशकंद से जब शास्त्री जी का मृत शरीर लाया गया था तो उनके भी चेहरे का रंग नीला, काला पड़ गया था। और अन्य लोगों की तरह राजीव भाई भी ये मानते थे कि शास्त्री जी को विष दिया गया था। राजीव भाई और शास्त्री जी की मृत्यु में एक जो समानता है कि दोनों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था। राजीव भाई ने अपने पूरे जीवन में देश भर में घूम घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये। सन् 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे। उन्होंने विदेशी कंपनियों की नाक में दम कर रखा था।

भारत के किसी भी मीडिया चैनल ने उनको दिखाने का साहस नहीं किया। क्योंकि वह देश से जुड़े ऐसे मुद्दों पर बात करते थे की एक बार लोग सुन लें तो देश में 1857 से बड़ी क्रान्ति हो जाती। वह ऐसे ओजस्वी वक्ता थे जिनकी वाणी पर माँ सरस्वती साक्षात निवास करती थी। जब वे बोलते थे तो सोता घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर उनको सुना करते थे। 30

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