स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभारत की खोज की, और मैं मानता हूँ कि वो एकदम गलत है, वास्कोडीगामा ने भारत की कोई खोज नहीं की, हिंदुस्तान की भी कोई खोज नहीं की, हिंदुस्तान पहले से था, भारत पहले से था।
वास्कोडीगामा यहाँ आया था भारतवर्ष को लूटने के लिए, एक बात और जो इतिहास में, मेरे अनुसार बहुत गलत बताई जाती है कि वास्कोडीगामा एक बहुत बहादुर नाविक था, बहादुर सेनापति था, बहादुर सैनिक था, और हिंदुस्तान की खोज के अभियान पर निकला था, ऐसा कुछ नहीं था, सच्चाई ये है कि पुर्तगाल का वो उस ज़माने का डॉन था, माफ़िया था। जैसे आज के ज़माने में हिंदुस्तान में बहुत सारे माफ़िया किंग रहे हैं, उनका नाम लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मंदिर की पवित्रता खत्म हो जाएगी, ऐसे ही बहुत सारे डॉन और माफ़िया किंग 15वीं शताब्दी में होते थे यूरोप में और 15वीं शताब्दी का जो यूरोप था। वहाँ दो देश बहुत ताकतवर थे उस ज़माने में, एक था स्पेन और दूसरा था पुर्तगाल। तो वास्कोडीगामा जो था वो पुर्तगाल का माफ़िया किंग था। सन् 1490 के आस पास से वास्को डी गामा पुर्तगाल में चोरी का काम, लुटेरे का काम, डकैती डालने का काम ये सब किया करता था, और अगर सच्चा इतिहास उसका आप खोजिए तो एक चोर और लुटेरे को हमारे इतिहास में गलत तरीके से हीरो बना कर पेश किया गया और ऐसा जो डॉन और माफ़िया था उस ज़माने का पुर्तगाल का ऐसा ही एक दुसरा लुटेरा और डॉन था, माफ़िया था उसका नाम था कोलंबस, वो स्पेन का था।
तो हुआ क्या था, कोलंबस गया था अमेरिका को लूटने के लिए और वास्कोडीगामा आया था भारतवर्ष को लूटने के लिए, लेकिन इन दोनों के दिमाग में ऐसी बात आई कहीं से, कोलंबस के दिमाग में ये किसने डाला की चलो अमेरिका को लुटा जाए, और वास्कोडीगामा के दिमाग में किसने डाला कि चलो भारतवर्ष को
लुटा जाए, तो इन दोनों को ये कहने वाले लोग कौन थे? अतुल भाई जो बता रहे थे, वही बात मैं आपसे दोहरा रहा हूँ। हुआ क्या था कि 14वीं और 15वीं शताब्दी के बीच का जो समय था, यूरोप में दो ही देश थे जो ताकतवर माने जाते थे, एक देश था स्पेन, दूसरा था पुर्तगाल, तो इन दोनों देशों के बीच में अक्सर लड़ाई झगड़े होते थे, लड़ाई झगड़े किस बात के होते थे कि स्पेन के जो लुटेरे थे, वो कुछ जहाँजो को लूटते थे तो उसकी संपत्ति उनके पास आती थी, ऐसे ही पुर्तगाल के कुछ लुटेरे हुआ करते थे वो जहाँजो को लूटते थे तो उनके पास संपत्ति आती थी, तो संपत्ति का झगड़ा होता था कि कौन-कौन संपत्ति ज्यादा रखेगा। स्पेन के पास ज्यादा संपत्ति जाएगी या पुर्तगाल के पास ज्यादा संपत्ति जाएगी, तो उस संपत्ति का बटवारा करने के लिए कई बार जो झगड़े होते थे वो वहाँ की धर्मसत्ता के पास ले जाए जाते थे, और उस ज़माने की वहाँ की जो धर्मसत्ता थी, वो क्रिस्चियनिटी की सत्ता थी, और क्रिस्चियनिटी की सत्ता 1492 में के आसपास पोप होता था जो सिक्स्थ कहलाता था, छठवा पोप।
तो एक बार ऐसे ही झगड़ा हुआ, पुर्तगाल और स्पेन की सत्ताओं के बीच में, और झगड़ा किस बात को ले कर था? झगड़ा इस बात को ले कर था कि लूट का माल जो मिले वो किसके हिस्से में ज्यादा जाए, तो उस ज़माने के पोप ने एक अध्यादेश जारी किया, आदेश जारी किया, एक नोटिफिकेशन
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