भारतकोश
तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Taittiriya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished261 पृष्ठ

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शिक्षावल्ली —•1•|००|•1•— प्रथम अनुवाक सम्बन्ध-भाष्य यस्माज्जातं जगत्सर्वं यस्मिन्नेव प्रलीयते । येनेदं धार्यते चैव तस्मै ज्ञानात्मने नमः ॥ १ ॥ जिससे सारा जगत् उत्पन्न हुआ है, जिसमें ही यह लीन होता है और जिसके द्वारा यह धारण किया जाता है उस ज्ञानस्वरूपको मेरा नमस्कार है । यैरिमे गुरुभिः पूर्वं पदवाक्यप्रमाणतः । व्याख्याताः सर्ववेदान्तास्तान्नित्यं प्रणतोऽस्म्यहम् ॥ २ ॥ पूर्वकालमें जिन गुरुजनोंने पद, वाक्य और प्रमाणोंके विवेचनपूर्वक इन सम्पूर्ण वेदान्तों (उपनिषदों) की व्याख्या की है उन्हें मैं सर्वदा नमस्कार करता हूँ । तैत्तिरीयकसारस्य मयाचार्यप्रसादतः । विस्पष्टार्थरुचीनां हि व्याख्येयं संप्रणीयते ॥ ३ ॥ जो स्पष्ट अर्थ जाननेके इच्छुक हैं उन पुरुषोंके लिये मैं श्रीआचार्यकी कृपासे तैत्तिरीयशाखाके सारभूत इस उपनिषद्की व्याख्या करता हूँ । CC-0 Pt. Chakradhar Joshi and Sons, Dev Prayag. Digitized by eGangotri