भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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...)? Wait, Panini 5.3.45: द्वित्र्योश्च धमुञ्. Vartika: धमुञन्तात्स्वार्थे डदर्शनम्? Wait, from द्वैधम् -> द्वैधम् + ड = द्वैधम्? Or द्वैधम् + कन् = द्वैधकम्? Wait, the Mahabhashya says: "धमुञन्तात्स्वार्थे डदर्शनम्" or "कदर्शनम्"? No, धमुञन्तात्स्वार्थे डप्रत्ययो वक्तव्यःor something? No,डदर्शनम्! Look at the text: डदर्शनम् * ॥ पथिYes, it literally saysडदर्शनम् * ॥ पथि`.

Wait, in line 26: स्यात् चादाच् ॥ दक्षिणाद्दि । दक्षिणा ॥ Wait, let's write दक्षिणाद्दि as printed (it clearly has द्दि).

Everything is verified and ready.( २३६ ) सिद्धान्तकौमुद्याम्- थालोऽपवादः ॥ एतदोपि वाच्यः * ॥ अनेन एतेन वा प्रकारेण इत्थम् ॥ किमश्च । ५ । ३।२५ ॥ केन प्रकारेण कथम् ॥ इति विभक्तिसंज्ञकप्रकरणम् । अथ प्रागिवीयप्रकरणम् ।

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