भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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चौबीसवां अध्याय विभिन्न देवी देवताओं के लिए अलगअलग जीव जंतु १-४० ३०४-३११ पच्चीसवां अध्याय विभिन्न अंगों से देवी की प्रसन्नता १ ३१२ विभिन्न देवों के लिए आहुति अर्पण २-३ ३१२-३१३ अस्थि और देव ४-६ ३१३-३१४ शारीरिक अंगों से देवों का संबंध ७-९ ३१४ देवों के लिए हवि का विधान १०-१३ ३१५ कल्याण व रक्षा की कामना १४-२२ ३१५-३१७ सृष्टि की अनश्वरता २३ ३१७ देवों का पराक्रम २४ ३१७ यज्ञ का प्रिय पदार्थ पुरोडाश २५-२६ ३१७ यज्ञ से इच्छित उद्देश्यों की प्राप्ति २७-२८ ३१७-३१८ यज्ञ के हित साधक कार्य २९ ३१८ यज्ञ पशु पर नियंत्रण ३० ३१८ यज्ञ पशु के अंग देवों को समर्पित ३१-३४ ३१८-३१९ पुरोडाश की परिपक्वता ३५-३७ ३१९ यज्ञ के अश्व का व्यवहार एवं श्रृंगार ३८-४१ ३१९-३२० कालगत विभाजन ४२ ३२० अश्व की स्तुति ४३-४५ ३२०-३२१ इंद्र तथा अन्य देवों की उपासना ४६-४७ ३२१ छब्बीसवां अध्याय अग्नि आदि देवों से अनुकूलता के लिए प्रार्थना १-२ ३२२ बृहस्पति देव की उपासना ३ ३२२-३२३ इंद्र देव की स्तुति ४-५ ३२३ अग्नि देव की स्तुति ६-९ ३२३-३२४ इंद्र की स्तुति १०-११ ३२४ अग्नि से अन्न व बल की याचना १२-१३ ३२४ यज्ञ विस्तार की कामना १४ ३२४-३२५ ब्राह्मणों में बुद्धि १५ ३२५ सोम की स्तुति १६-१९ ३२५