भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 314, कुल 421 में से

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पृष्ठ 314

उत्तरार्ध पच्चीसवां अध्याय मरुता ᳪ स्कन्धा विश्वेषां देवानां प्रथमा कीकसा रुद्राणां द्वितीयादित्यानां तृतीया वायोः पुच्छमग्नीषोमयोर्भासदौ क्रुञ्चौ श्रोणिभ्यामिन्द्राबृहस्पती ऊरुभ्यां मित्रावरुणावलाभ्यामाक्रमण ᳪ स्थूराभ्यां बलं कुष्ठाभ्याम्.. (६) कंधे की अस्थि मरुद्गणों, प्रथम अस्थि विश्वे देवों, दूसरी अस्थि रुद्रगणों, तीसरी अस्थि आदित्यगणों, पूंछ वायु, नितंब अग्नि और सोम से संबंधित हैं. जंघाएं क्रौंच देव व दोनों जंघाएं इंद्र देव और बृहस्पति देव, दोनों जंघाएं मित्र देव वरुण देव से संबंधित हैं. नीचे का भाग आक्रमण से संबंधित है. ऊपर का भाग बल देव से संबंधित है. ( ६ ) पूषणं वनिष्ठुनान्धाहीन्स्थूलगुदया सर्पान्गुदाभिर्विद्युत ऽ आन्त्रैरपो वस्तिना वृषणमाण्डाभ्यां वाजिन ᳪ शेपेन प्रजा ᳪ रेतसा चाषान् पित्तेन प्रदरान् पायुना कूश्माञ्छकपिण्डैः.. (७) बड़ी आंत पूषा देव, स्थूल गुदा अंधे सर्प देव, सामान्य गुदा अन्य सर्प देवों, बची हुई आंतें विद्युत् देव, वस्ति भाग जल देव, अंडकोष वृषण देव व उपस्थ बल देव से संबंधित हैं. वीर्य प्रजापति देव, पित्त चाष देव, पायु ( गुदा ) प्रदर देव व शक पिंड कूश्म देव से संबंधित हैं. ( ७ ) इन्द्रस्य क्रोडोदित्यै पाजस्यं दिशां जत्र्वोदित्यै भसज्जीमूतान् हृदयौपशेनान्तरिक्षं पुरीतता नभ ऽ उदयैन चक्रवाकौ मतस्नाभ्यां दिवं वृक्काभ्यां गिरीन् प्लाशिभिरुपलान् प्लीह्ना वल्मीकान् क्लोमभिर्गल्लोभिर्गुल्मान् हिराभिः स्रवन्तीर्ह्रदान् कुक्षिभ्या ᳪ समुद्रमुदरेण वैश्वानरं भस्मना.. (८) क्रोड इंद्र देव, पैर अदिति देव, हंसली अदिति देव, मेढ्राग्र अदिति देव, हृदय प्रदेश और नाड़ीप्रदेश अंतरिक्ष देव, पेट आकाश देव व फेफड़े चक्रवाक से संबंधित हैं. दोनों वृक्क ( गुर्दे ) पर्वत देव, क्लोम वाल्मीकि देव, क्लोमादि गुल्म, रक्त शिराएं नदी, कांख हृदय, पेट समुद्र व भस्म वैश्वानर से संबंधित हैं. ( ८ ) विधृतिं नाभ्या घृत ᳪ रसेनापो यूष्णा मरीचीर्विप्रुड्भर्नीहारमूष्मणा शीनं वसया पुष्वा अश्रुभिर्ह्रादुनीर्दूपीकाभिरस्ना रक्षा ᳪ सि चित्राण्यङ्गैर्नक्षत्राणि रूपेण पृथिवीं त्वचा जुम्बकाय स्वाहा.. (९) नाभि विधृति, वीर्य घृत, पकवान जल देव, वसा मरीचि देव, शरीर की गरमाई ओस देव, वसा शनि देव, आंसू फुहार देव गीड़ ( आंख की कीच ) ह्रादुनी आकाशीय विद्युत् देव से संबंधित हैं. खून के कण रक्षा देव, शारीरिक विभिन्न अंग विभिन्न देवों, शारीरिक सौंदर्य, नक्षत्र देवों व त्वचा पृथिवी देवी और त्वचा जुंबक देव से संबंधित हैं. ( ९ ) ३१४ - यजुर्वेद

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