युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)
Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary
महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 57, कुल 278 में से
संदर्भ में पढ़ेंिश्रं द्वन्द्वमाचरेत् ॥ १३१ ॥`
Line 9:
आश्रित्वा कृत्रिमं द्वन्द्वं बलवद्वैरिणोदिशि ।
Line 10:
अन्यत्र कृत्रिमद्वन्द्वं कृत्वा नरपति र्व्वशेत् ॥ १३२ ॥
Wait, "र्व्वशेत्" or "र्व्वसेत्"?
Look at the letter: र्व्व then शेत् or सेत्?
It is शेत्: र्व्वशेत् (with talavya sha).
Line 11:
रथपतिर्य्यदा वैरी जले (७) द्वन्द्वं तदाचरेत् ।
Wait, "वैरो" or "वैरी"?
Line 11: वैरी - wait, look at the matra: it's an ee-kar with ra-phala: वैरी? Wait, वैरो?
Look at: वै then री? It has a vertical line and a curve to the right, री.
Wait, look at line 12: वैरो or वैरी?
Line 12 has द्वैरो or द्वैरी? It has an ee-kar ी. द्वैरी.
Line 13: `गिरि-द्वन्द्वं नृपः सेवेन्मुख्यः